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गुरुवार, 31 अक्तूबर 2013

सफलता, समृद्धि और श्रेष्ठता की नई ईबारतें गढ़ता हरियाणा

१ नवम्बर/ हरियाणा दिवस विशेष
सफलता, समृद्धि और श्रेष्ठता की नई ईबारतें गढ़ता हरियाणा
-राजेश कश्यप

संविधान के सातवें संशोधन द्वारा भारतवर्ष के सत्रहवें राज्य के रूप में हरियाणा प्रदेश का उदय मंगलवार, १ नवम्बर, १९६६ को हुआ। अलग राज्य बनने से पहले यह पंजाब का ही भाग था। अस्तित्व में आने के बाद हरियाणा प्रदेश ने हर क्षेत्र में बेहद उल्लेखनीय प्रगति की है, विकास के मामले में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं और कई क्षेत्रों में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। अस्तित्व के समय हरियाणा प्रदेश की जनसंख्या १ करोड़ २९ लाख थी। वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार इस समय प्रदेश की जनसंख्या २,२३,५३,०८१ है, जोकि देश की कुल जनसंख्या का २.०९ प्रतिशत है। इनमें १,३५,०५,१३० पुरूष और १,१८,४७,९५१ महिलाएं हैं शामिल हैं। जनसंख्या की दृष्टि से हरियाणा का देश में सोलहवां स्थान है। हरियाणा प्रदेश का कुल क्षेत्रफल ४४,२१२ वर्गकिलोमीटर है, जोकि भारत के कुल क्षेत्रफल का १.३४ प्रतिशत है। हरियाणा का जनसंख्या घनत्व ५७३ व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर है, जोकि देश में छठा स्थान रखता है।
सर्वविद्यित है कि हरियाणा प्रदेश कृषि प्रधान रहा है। हरियाणा ने कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में बड़ी तेजी से उल्लेखनीय एवं अनुकरणीय विकास किया है। वर्ष १९६६ में राज्य के गठन के समय खाद्यान्नों का उत्पादन २५ लाख ९२ हजार टन था, जोकि वर्ष २०११-१२ में बढकर रिकाडऱ् १८३.४२ लाख टन और वर्ष २०१२-१३ में १७२.७४ लाख टन तक पहुँच गया। हरियाणा ने उत्पादन एवं उत्पादकता में वर्ष २०१२-१३ के दौरान श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रिकाडऱ् उत्पादन किया है। इनमें गेहूं का १११.१७ लाख टन, बाजरे का १९.२५ क्विंटल प्रति हेक्टेयर, सरसों का १७.२१ क्विवंटल प्रति हेक्टेयर और धान का २५.८७ क्विंटल प्रति हैक्टेयर रिकाडऱ् उत्पादन किया है। इसके साथ ही केन्द्रीय गेहूं भण्डार में ८७.१६ लाख मीट्रिक टन का योगदान देकर अपनी श्रेष्ठता का परिचय दिया है। राष्ट्र को खाद्यान्न भण्डार में योगदान देने में हरियाणा प्रदेश को दूसरा स्थान हासिल है। हरियाणा ने किसानों की उन्नति एवं प्रगति के लिए १४५९ सघन नहरी तन्त्र विकसित किया है। हरियाणा में नहरों की कुल लंबाई १४,४४३ किलोमीटर है। प्रदेश में नहरों द्वारा सिंचित क्षेत्र २०.८९ लाख हैक्टेयर तक पहुंच चुका है।
पशुधन के मामले में हरियाणा प्रदेश ने विश्व में अपना डंका बजाया हैं। इस प्रदेश की मुर्राह नस्ल भैंस विश्वविख्यात हो चुकी हैं। मुर्राह नस्ल की भैंस को अधिकतम दूध देने का गौरव हासिल हो चुका है। श्देशां में देश हरियाणा-जित दूध दही का खाणा्य कहावत का चरितार्थ करते हुए हरियाणा प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष २०१२-१३ में राज्य में हरियाणा डेरी सहकारी विकास प्रसंघ द्वारा औसतन दुग्ध संकलन ३.८६ लाख लीटर प्रतिदिन रहा। औसत दूध की बिक्री ३.७० लाख लीटर रही। वर्ष २०१३ में प्रदेश सरकार ने ५ दुग्ध संयंत्रों की क्षमता ४.७० लाख लीटर से बढ़ाकर ८.८० लाख लीटर प्रतिदिन कर दिया है। वित्तवर्ष मार्च, २०१३ तक घी की कुल बिक्री ४२०४ मीट्रिक टन रही। विभिन्न नगरों व कस्बों में लगभग ३५४ दुग्ध बूथों की स्थापना की गई है। वर्ष २०१२-१३ के दौरान प्रसंघ का कुल टर्न ओवर ९५८ करोड़ रूपये का रहा। हरियाणा में वर्ष १९६६ में कुल मछली उत्पादन ६०० टन था, वहीं वर्ष २०१०-११ में ९४००० टन की बढ़ौतरी दर्ज की गई। मत्स्य पालन में वर्ष २०१०-११ में प्रति इकाई देशभर में हरियाणा को दूसरा स्थान हासिल हुआ। इस समय हरियाणा में २० मत्स्य स्वास्थ्य सुरक्षा, १४ जलचर पॉलीक्लिनिक तथा राज्य स्तर पर एक जांच प्रयोगशाला खोली गई है।
हरियाणा प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। हरियाणा की साक्षरता दर में सराहनीय बढ़ौतरी दर्ज हुई है। जब वर्ष १९६६ में हरियाणा अस्तित्व में आया, उस समय हरियाणा की साक्षरता दर मात्र २० प्रतिशत ही थी। वर्ष २००१ में प्रदेश की साक्षरता दर ६७.९ प्रतिशत थी, जोकि वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार यह बढक़र ७५.६ हो गई है। महिला साक्षरता दर भी ५५.७ प्रतिशत से बढक़र ६५.९ प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ौतरी दर्ज की गई है। हरियाणा में गत आठ वर्षों के दौरान प्रदेश में विश्वविद्यालयों की संख्या ८ से बढक़र ३६ हो चुकी है। इस समय प्रदेश में ६६२ तकनीकी संस्थानों के अतिरिक्त ७०१ सरकारी और निजी महाविद्यालय हैं। इस दौरान प्रदेश में ३५ नए राजकीय महाविद्यालय और ५०१ नए तकनीकी संस्थान खोले गए है।  प्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लगभग १२ लाख विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विश्व स्तरीय शिक्षा केन्द्र के रूप में राजीव गांधी एजुकेशन सिटी स्थापित की जा रही है, जिसमें १.५ लाख छात्र एक साथ पढ़ाई कर सकेंगे। यह एजुकेशन सिटी उच्चतर शिक्षा और नैनो टैक्नोलोजी, बॉयो टैक्नोलोजी और जैनिटिक्स जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान का एक प्रमुख केन्द्र बनेगी। यहां पर स्थापित किये जा रहे प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की तर्ज पर होंगे। प्रदेश में वर्ष २००५ की केवल ३५० सीटों की तुलना में इस समय सरकारी और निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस की कुल ८०० सीटे हैं। हरियाणा ऐसा पहला राज्य है जो अनुसूचित जाति और बीपीएल परिवारों के लगभग २० लाख गरीब विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां दे रहा है।
 हरियाणा के गठन के समय वर्ष १९६६ में मात्र ६ बहुतकनीकी संस्थान (चार राजकीय और दो सरकारी सहायता प्राप्त) और एक इंजीनियरिंग संस्थान था, जिनमें दाखिला लेने की वार्षिक क्षमता १३४१ विद्यार्थियों की थी। जबकि शैक्षणिक सत्र २०१२-१३ में १,४३,००० सीटों के साथ संस्थानों की कुल संख्या बढक़र ६४३ हो गई है। वर्ष १९६६ में हरियाणा में ७१५६ सीटों के साथ ४८ राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान थे। आज प्रदेश में औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग शिल्पकार प्रशिक्षण के तहत १३१ राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और ९४ निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं। वर्ष २०१२-१३ के दौरान राजकीय औद्योगिक शिल्प संस्थानों में उत्कृष्टता केन्द्रों सहित २५०५ ट्रेडों में ३९१६८ स्वीकृत सीटें थीं तथा निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में १४४१६ सीटें थीं। १२वीं पंचवर्षीय योजना के लिए राज्य में १६.७५ लाख लोगों को औद्योगिक प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
रचनात्मक कलाओं को प्रोत्साहन देने के लिए रोहतक में फैशन डिजायन, फिल्म एवं टेलीविजन और फाईन आर्ट्स के राज्य संस्थान स्थापित किए जा चुके हैं। शिक्षा की उच्च गुणवता के लिए प्रदेश सरकार द्वारा सोनीपत जिले के खानपुर कलां में महिला विश्वविद्यालय, महेन्द्रगढ़ जिले में केन्द्रीय विश्वविद्यालय, रोहतक में स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और हिसार में पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय खोले गये हैं। इसके साथ ही रोहतक में आईआईएम, गुडगाँव के बिनौला गाँव में देश का प्रथम रक्षा विश्वविद्यालय, मीरपुर में इन्दिरा गांधी विश्वविद्यालय, सोनीपत जिले के राई में राजीव गांधी एजुकेशन सीटी स्थापित की जा रही है। कुरूक्षेत्र जिले के उमरी गाँव में राष्ट्रीय डिजाय संस्थान खोला जा रहा है, जोकि उत्तरी भारत का एकमात्र संस्थान होगा। यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर का संस्थान होगा और इसकी स्थापना में जापान तकनीकी सहायता देगा। पंचकूला जिले के मानकपुर गाँव में नेशलन इंस्टीच्यूट ऑफ फैशन टैक्नोलोजी स्थापित किया जाएगा, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैशन प्रशिक्षण दिया जाएगा। सोनीपत में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है। औद्योगिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जीन्द जिले में हरियाणा इंस्टीच्यूट ऑफ एजुकेशन ट्रेनिंग एण्ड रिसर्च स्थापित किया जा रहा है। एनसीआर क्षेत्र के लोगों के लिए गुडगाँव में एक नया विश्वविद्यालय खोला जा रहा है। झज्जर जिले में स्थापित आईआईटी का विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश के तकनीकी शिक्षण सस्थानों में १.२१ लाख सीटों की बढ़ौतरी भी की गई है। झज्जर जिले के मातनहेल गाँव में पुलिस यूनिवर्सिटी स्थापित करना प्रस्तावित किया गया है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में हरियाणा ने बड़ी तेजी से उन्नति की है। इस समय हरियाणा में तीन नए मैडीकल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। इनमें मेवात जिले में नल्हड़ मैडीकल कॉलेज, करनाल में कल्पना चावला मैडीकल कॉलेज और झज्जर के बाढ़सा में एम्स-दो शामिल है। इससे पूर्व रोहतक में पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की जा चुकी है। इसके साथ ही हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्य है, जहां प्रत्येक स्वास्थ्य केन्द्र पर वाहनों की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इनके अलावा, राज्य में एंडवांस लाईफ स्पोर्ट सिस्टम एंबुलेंस सुविधा भी शुरू की गई है, जोकि दिनरात सेवा में तत्पर रहती है। निश्चित तौरपर इन्हें चिकित्सा के क्षेत्र में हरियाणा प्रदेश की अभूतपूर्व उपलब्धि कहा जा सकता है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र प्रदेश की प्राथमिक सूची में शामिल है।
हरियाणा में वर्ष २००५-०६ में मातृ-मृत्यु दर १८६ थी, जोकि घटकर १५३ रह चुकी है। अब इसे मात्र दो अंकों में लाने के लिए कमर कसी जा चुकी है। वर्ष २००२ में शिशु मृत्यु दर १००० के मुकाबले ६१ थी, जोकि वर्ष २०१० के आते-आते ४८ ही रह गई है। संस्थागत प्रसूतियों का ग्राफ ८३ प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इस समय प्रदेश में आर्थिक पैकेज के तहत १५०० करोड़ रूपये की स्वास्थ्य परियोजनाओं पर काम चल रहा है। पीएनडीटी एक्ट का सख्ती से लागू करने के परिणामस्वरूप प्रदेश के लिंगानुपात में भी सुधार आया है। वर्ष २००१ की जनगणना के अनुसार प्रदेश का अनुपात ८६१ था, जोकि १८ अंकों के सुधार के साथ वर्ष २०११ की जनगणना के मुताबिक ८७७ हो गया है। पीएनडीटी अधिनियम के तहत अब तक २५ चिकित्सकों को सजा दी जा चुकी है और ३७७ अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों का पंजीकरण निलंबितध्रद्द किया जा चुका है। इसके साथ ही १७७ अल्ट्रासाउण्ड मशीनें पकड़ी जा चुकी हैं। कन्या-भ्रण हत्या को रोकने में उल्लेखनीय एवं अनुकरणीय पहल करने वाले जीन्द जिले के बीबीपुर गाँव की पंचायत को एक करोड़ रूपये की धनराशि से सम्मानित किया गया है।
हरियाणा ने खेलों के क्षेत्र में भी अपना परचम फहराया है। वर्ष २०१२ के लन्दन ओलम्पिक खेलों में भारत ने कुल छह पदक जीते, जिनमें से चार पदक हरियाणा के होनहार खिलाडियों ने अपने नाम किए। वर्ष २००८ के बीजिंग ओलम्पिक खेलों में भी हरियाणा के खिलाडियों ने तीन में से दो पदक अपने नाम किए थे। इस समय हरियाणा में दो राज्य स्तरीय स्टेडियम, २१ जिला स्तरीय स्टेडियम व २२१ छोटे स्टेडियम हैं। इसके साथ ही २२६ नए ब्लॉक स्तरीय स्टेडियमों का निर्माण होने वाला है। सरकार द्वारा चालू वित्तवर्ष के दौरान खेल बजट को बढ़ाकर तीन गुना यानि १०७ करोड़ किया जा चुका है। हरियाणा सरकार की खेल नीति श्पदक लाओ, पद पाओ्य के तहत वर्ष २००५ से लेकर अब तक ४२४ से अधिक खिलाडियों को योग्यतानुसार नौकरियां भी दी चुकी हैं। राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक लाने वाले खिलाडियों को पदो ंके साथ-साथ भारी धनराशि से भी पुरस्कृत किया जा रहा है। लन्दन ओलम्पिक विजेता खिलाडियो को करोड़ों रूपये की धनराशि एवं उपहार हरियाणा सरकार ने दिल खोलकर दिए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने वर्ष २०१६ में रियोल (ब्राजील) में होने वाले ओलम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को ५ करोड़ रूपये, रजत पदक विजेता को ३ करोड़ रूपये और कांस्य पदक विजेता को २ करोड़ रूपये की धनराशि देने की घोषणा की है। हरियाणा सरकार की खेल एवं शारीरिक योग्यता परीक्षण (स्पैट) योजना के तहत नए होनहार खिलाडियों को खोजने व उन्हें आगे बढ़ाने में बेहद कामयाब हो रही है। हरियाणा सरकार ने खेल की आधारभूत संरचना, उभरते खिलाडियों की प्रतिभा को विकसित करने के उद्देश्य से वर्ष २०१० में श्स्पेट्य योजना शुरू की। इस योजना के तहत वर्ष २०१० में १६०६, वर्ष २०११ में ४९९६, वर्ष २०१२ में ५००० और वर्ष २०१३ में ५००० प्रतिभाशाली खिलाडियां का चयन किया गया।
हरियाणा में २ राज्य स्तरीय खेल स्टेडियम, ५ हॉकी एस्ट्रोटर्फ तथा ३ सिंथेटिक टै्रक, १३ उपमण्डल स्तर के खेल स्टेडियम, ९ स्विमिंग पुल तथा ६ बहुद्देशीय हॉल निर्मित किए गए हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा हॉकी के लिए हिसार में एस्ट्रोटर्फ, फुटबाल के लिए दरियापुर (फतेहाबाद) में सिंथेटिक सरफेस खेल मैदान तथा महम में मुक्केबाजी एवं कुश्ती के लिए खेल प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। कुरूक्षेत्र जिले के शाहाबाद में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हॉकी अकादमी स्थापित की जा रही है।
हरियाणा प्रदेश में सडक एवं परिवार के क्षेत्र में बेहद प्रगति की है। हरियाणा के निर्माण के समय वर्ष १९६६ में कुल ४७५ बसें ही थीं, जोकि वर्ष २०१२ में बढक़र ३४९० हो गई हैं। परिवहन के बेड़े में बहुत जल्द ४००० नई बसें शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार के सहयोग से हरियाणा प्रदेश दिल्ली की मैट्रो से जुडने जा रहा है। दिल्ली-मैट्रो का विस्तार फरीदाबाद तक और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे मैट्रो स्टेशन से गुडगाँव तक और मुंडका (दिल्ली) से बहादुरगढ़ तक किया जा रहा है।
हरियाणा ने आर्थिक क्षेत्र में खूब तरक्की की है। हरियाणा ने ११वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान वित्तीय संशाधन जुटाने में देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। ११वीं पंचवर्षीय योजना के लिए योजना आयोग द्वारा गठित समूह ने दर्शाया है कि राष्ट्रीय औसत के अनुसार राज्यों ने ११वीं पंचवर्षीय योजना में अनुमानित संशाधनों का ९२.५ प्रतिशत जुटाया, जबकि हरियाणा ने अनुमानित संशाधनों का १९२ प्रतिशत जुटाने में सफलता हासिल की। अग्रिम अनुमानों के अनुसार वर्ष २०१२-१३ के लिए स्थिर कीमतों पर सकल घरेलू उत्पादा १९१८२०.७६ करोड़ रूपये है, जबकि तीव्र अनुमानों के अनुसार वर्ष २०११-१२ में यह १७९०९७ करोड़ रहा, जो वर्ष २०१२-१३ के लिए ७.१ प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि दर राष्ट्रीय स्तर पर अनुमानित ५ प्रतिशत से अधिक है। वर्ष २०१२-१३ में चालू कीमतों पर राज्य की प्रति व्यक्ति आय १,२३,५५४ रूपये आंकी गई है। यह वृद्धि १३.३ प्रतिशत है। वर्ष २०१३-१४ के दौरान ४३७८०.३३ करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्ति का अनुमान है, जो संशोधित अनुमान २०१२-१३ से १५.३५ प्रतिशत अधिक है। राजस्व कर २८७८४.३४ करोड़ रूपये है, जो संशोधित अनुमान २०१२-१३ से १८.५० प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वैट से १७.२६ प्रतिशत और आबकारी शुल्क में ३३.३३ प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। राजस्व खर्च १२.७७ प्रतिशत की वृद्धि के साथ ४६२२३.५६ करोड़ होने का अनुमान है।
हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं को वर्ष २००४-०५ में जहां प्रतिदिन ५७८ लाख यूनिट बिजली दी जा रही थी, वहीं वर्ष २०११-१२ में  प्रतिदिन १००९ लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति दी जा रही है। वर्ष २००४-०५ के दौरान कृषि क्षेत्र को २९१ लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली दी जा रही थी, वहीं वर्ष २०११-१२ में इसे बढ़ाकर ३९४ लाख यूनिट प्रतिदिन कर दिया गया है। वर्ष २०११-१२ में हरियाणा में स्वयं द्वारा उत्पादित बिजली बढकर ४३९०.५ मेगावॉट तक पहुंच चुकी है। जबकि, वर्ष २००४-०५ में यह मात्र १५८७.७ मेगावाट ही थी। झज्जर जिले के खानपुर गाँव में १३२० मेगावाट कोयले पर आधारित महात्मा गांधी सुपर थर्मल पावन प्लांट लगभग ६००० करोड़ रूपये की लागत से स्थापित किया गया है। यह प्रदेश की पहली बिजली इकाई है जो नवीनतम आधुनिक सुपर क्रिटिकल प्रोद्यौगिकी पर आधारित है। फतेहाबाद के गोरखपुर में २८०० मेगावाट बिजली परमाणु संयत्र की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। पिछले आठ वर्षों में ३४० नए सब स्टेशन बनाये गए हैं और ५७४ सब स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई गई है। संप्रेषण तंत्र के उन्नयन के लिए वर्ष २०१२-१३ व वर्ष २०१३-१४ के दौरान १८०० करोउ़ रूपये की योजना है। इन सब तथ्यों से सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि हरियाणा बहुत जल्द बिजली के मामले में पूर्ण रूप से आत्म-निर्भर राज्य बनने वाला है।
हरियाणा ने अस्तित्व में आने के बाद वाणिज्य एवं उद्योग में भी बड़ी उल्लेखनीय प्रगति की है। अब कृषि प्रधान हरियाणा प्रदेश देश के सर्वाधिक उद्योग वाले राज्यों में गिना जाने लगा है। प्रदेश में १३५९ बड़ी एवं मध्यम औद्योगिक इकाईयां स्थापित हैं और ६५१० लघु एवं सूक्ष्म उद्योग सफलता की नई कहानियां लिख रहे हैं। इनमें ७.६५ लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है और प्रदेश को १०,३५,११९ लाख रूपये का निवेश प्राप्त हुआ है। निवेशकों की नजर में हरियाणा प्रदेश सबसे पसन्दीदा प्रदेश बना है। हरियाणा में वर्ष २००५ के दौरान कुल ५९ हजार करोड़ रूपये का निवेश हुआ था, वहीं इस समय यह निवेश लगभग ९६ हजार करोड़ के आंकड़े को छूने को बेताब है। हरियाणा प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति ने अप्रत्याशित परिणाम देने शुरू कर दिये हैं। इस नीति के तरत प्रदेश भर में नये औद्योगिक मॉडल टाऊनशिप (आईएमटी) स्थापित किये जा रहे हैं। गत सात वर्षों के दौरान १०८ बड़े और मध्य स्तर के उद्योग एवं १४३३६ लघु स्तर के उद्योग लगे हैं। सूचना प्रोद्यौगिकी के निर्यात में भी हरियाणा देश में अग्रणी स्थान रखता है। यहां से २३००० करोड़ रूपये का निर्यात किया जा चुका है। विश्व सूचना प्रोद्योगिकी बीपीओ कार्यबल का चार प्रतिशत अकेले गुडगाँव जिले से है।
गत जुलाई, २०१३ में हरियाणा के भिवानी व महेन्द्रगढ़ जिले एनसीआर क्षेत्र में शामिल करने के बाद विकास की एक और नई ईबारत लिखे जाने की भूमिका तैयार हो चुकी है। इन दो जिलों के एनसीआर में शामिल होने से हरियाणा उपक्षेत्र का कुल क्षेत्र १३,४२८ वर्ग किलोमीटर से बढक़र २०,१०५ वर्ग किलोमीटर हो गया है, जोकि राज्य के कल क्षेत्र का ४५.४७ प्रतिशत है।
हरियाणा का सैन्य योगदान एक अद्भूत मिसाल के तौरपर लिया जाता है। इतिहास साक्षी है कि हरियाणा के वीर सूरमा सेनाओं में भर्ती होकर राष्ट्र की स्वतंत्रता, एकता, अखण्डता एवं उसकी अस्मिता की रक्षा के लिए हमेशा तन-मन-धन से समर्पित रहे हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भी इस प्रदेश के रणबांकुरे सेना में भर्ती होकर देश के प्रहरी की सशक्त भूमिका निभा रहे हैं। देश की सशस्त्र सेनाओं में चाहे वह जाट रेजीमेंट हो या फिर ग्रेनेडियरर्ज, राजपुताना राईफल्स हो या कुमाऊं रेजीमेंट, राजपूत रेजीमेन्ट हो या अन्य कोई टुकड़ी, सभी जगह हरियाणा के रणबांकुरों की उपस्थिति अहम् मिलेगी। अगर अभी तक के युद्धों पर नजर डालें तो पाएंगे कि हरियाणा के शूरवीर सभी युद्धों में अग्रणी रहे हैं। आंकड़े गवाह हैं कि हरियाणा देश की जनसंख्या का मात्र दो प्रतिशत है, फिर भी हरियाणा प्रदेश का सैन्य दृष्टि से योगदान कम से कम बीस प्रतिशत है। इसका अभिप्राय, देश की सेना का हर पाँचवा सिपाही हरियाणा की मिट्टी का लाला है। सैन्य पदकों के मामले में भी हरियाणा के रणबांकुरे तीसरे स्थान पर हैं। हरियाणा प्रदेश के लिए यह भी एक गौरवपूर्ण एवं ऐतिहासिक उपलब्धि है कि भिवानी जिले के गाँव बापौड़ा में जन्मे रणबांकुरे जनरल वी.के. सिंह भारतीय थल सेनाध्यक्ष के गौरवमयी पद को सुशोभित कर चुके हैं।
कुल मिलाकर, हरियाणा प्रदेश नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जिसे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहा जा रहा है। हरियाणा प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के लिए भारत सरकार द्वारा लगातार दो बार श्कृषि कर्मण पुरस्कार्य से नवाजा जा चुका है। हावर्ड बिजनेस स्कूल से सम्बद्ध इंस्टीच्यूट ऑफ कम्पेटिटिवनैस (आईएफसी) ने श्आईएफसी-मिंट स्टेट कम्पेटिटिवनैस अवार्ड-२०१२्य के लिए हरियाणा प्रदेश का चयन किया है। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रीन डिजायन-२०१२ के सम्मेलन में हरियाणा अक्षय उर्जा विभाग और हरेडा को श्एग्जेम्पलरी डेमोंस्ट्रेशन ऑफ इंटीग्रेशन ऑफ सोलर पैसिब फीजर अवार्ड्य से सम्मानित किया गया। हरियाणा लोकनिर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग को केन्द्र सरकार की निर्माण उद्योगिक विकास परिषद द्वारा श्विश्वकर्मा पुरस्कार्य से सम्मानित किया गया है। दी फैडरेशन ऑफ इण्डियन चौम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ने हरियाणा प्रदेश को श्वर्ष २०१२ का सर्वोत्कृष्ट खेल राज्य्य पुरस्कार से नवाजा। एनडीटीवी ने खेल प्रोत्साहन के क्षेत्र में हरियाणा को सर्वोत्कृष्ट राज्य का सम्मान दिया। उर्जा नवीनीकरण एवं संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा हरियाणा प्रदेश को वर्ष २०१०-११ के लिए दूसरे पुरस्कार से सम्मानित किया। सभी क्षेत्रों में विकास के लिए हरियाणा को श्फायनेंसियल इनक्लूजन अवार्ड-२०१२्य से सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही हरियाणा को अपनी संपत्ति, भू-अभिलेख एवं जमाबंदी मानचित्रण की गतिशील एकीकरण परियोजना के लिए सीएसआई-निहिलेंट ई-प्रशासन पुरस्कार २०११-१२ से नवाजा गया है। इस तरह से हरियाणा प्रदेश सफलता, समृद्धि और श्रेष्ठता की नित नई ईबारत गढ़ रहा है।
(लेखक राजेश स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक हैं।)   

(राजेश कश्यप)
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक।
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राजेश कश्यप
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक
म.नं. १२२९, पाना नं. ८, नजदीक शिव मन्दिर,
गाँव टिटौली, जिला. रोहतक
हरियाणा-१२४००५
मोबाईल. नं. ०९४१६६२९८८९
e-mail : rajeshtitoli@gmail.com

(लेखक परिचयरू हिन्दी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में द्वय स्नातकोत्तर। दो दशक से सक्रिय समाजसेवा व स्वतंत्र लेखन जारी। प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में दो हजार से अधिक लेख एवं समीक्षाएं प्रकाशित। आधा दर्जन पुस्तकें प्रकाशित। दर्जनों वार्ताएं, परिसंवाद, बातचीत, नाटक एवं नाटिकाएं आकाशवाणी रोहतक केन्द्र से प्रसारित। कई विशिष्ट सम्मान एवं पुरस्कार हासिल।)