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गुरुवार, 31 अक्तूबर 2013

सफलता, समृद्धि और श्रेष्ठता की नई ईबारतें गढ़ता हरियाणा

१ नवम्बर/ हरियाणा दिवस विशेष
सफलता, समृद्धि और श्रेष्ठता की नई ईबारतें गढ़ता हरियाणा
-राजेश कश्यप

संविधान के सातवें संशोधन द्वारा भारतवर्ष के सत्रहवें राज्य के रूप में हरियाणा प्रदेश का उदय मंगलवार, १ नवम्बर, १९६६ को हुआ। अलग राज्य बनने से पहले यह पंजाब का ही भाग था। अस्तित्व में आने के बाद हरियाणा प्रदेश ने हर क्षेत्र में बेहद उल्लेखनीय प्रगति की है, विकास के मामले में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं और कई क्षेत्रों में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। अस्तित्व के समय हरियाणा प्रदेश की जनसंख्या १ करोड़ २९ लाख थी। वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार इस समय प्रदेश की जनसंख्या २,२३,५३,०८१ है, जोकि देश की कुल जनसंख्या का २.०९ प्रतिशत है। इनमें १,३५,०५,१३० पुरूष और १,१८,४७,९५१ महिलाएं हैं शामिल हैं। जनसंख्या की दृष्टि से हरियाणा का देश में सोलहवां स्थान है। हरियाणा प्रदेश का कुल क्षेत्रफल ४४,२१२ वर्गकिलोमीटर है, जोकि भारत के कुल क्षेत्रफल का १.३४ प्रतिशत है। हरियाणा का जनसंख्या घनत्व ५७३ व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर है, जोकि देश में छठा स्थान रखता है।
सर्वविद्यित है कि हरियाणा प्रदेश कृषि प्रधान रहा है। हरियाणा ने कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में बड़ी तेजी से उल्लेखनीय एवं अनुकरणीय विकास किया है। वर्ष १९६६ में राज्य के गठन के समय खाद्यान्नों का उत्पादन २५ लाख ९२ हजार टन था, जोकि वर्ष २०११-१२ में बढकर रिकाडऱ् १८३.४२ लाख टन और वर्ष २०१२-१३ में १७२.७४ लाख टन तक पहुँच गया। हरियाणा ने उत्पादन एवं उत्पादकता में वर्ष २०१२-१३ के दौरान श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रिकाडऱ् उत्पादन किया है। इनमें गेहूं का १११.१७ लाख टन, बाजरे का १९.२५ क्विंटल प्रति हेक्टेयर, सरसों का १७.२१ क्विवंटल प्रति हेक्टेयर और धान का २५.८७ क्विंटल प्रति हैक्टेयर रिकाडऱ् उत्पादन किया है। इसके साथ ही केन्द्रीय गेहूं भण्डार में ८७.१६ लाख मीट्रिक टन का योगदान देकर अपनी श्रेष्ठता का परिचय दिया है। राष्ट्र को खाद्यान्न भण्डार में योगदान देने में हरियाणा प्रदेश को दूसरा स्थान हासिल है। हरियाणा ने किसानों की उन्नति एवं प्रगति के लिए १४५९ सघन नहरी तन्त्र विकसित किया है। हरियाणा में नहरों की कुल लंबाई १४,४४३ किलोमीटर है। प्रदेश में नहरों द्वारा सिंचित क्षेत्र २०.८९ लाख हैक्टेयर तक पहुंच चुका है।
पशुधन के मामले में हरियाणा प्रदेश ने विश्व में अपना डंका बजाया हैं। इस प्रदेश की मुर्राह नस्ल भैंस विश्वविख्यात हो चुकी हैं। मुर्राह नस्ल की भैंस को अधिकतम दूध देने का गौरव हासिल हो चुका है। श्देशां में देश हरियाणा-जित दूध दही का खाणा्य कहावत का चरितार्थ करते हुए हरियाणा प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष २०१२-१३ में राज्य में हरियाणा डेरी सहकारी विकास प्रसंघ द्वारा औसतन दुग्ध संकलन ३.८६ लाख लीटर प्रतिदिन रहा। औसत दूध की बिक्री ३.७० लाख लीटर रही। वर्ष २०१३ में प्रदेश सरकार ने ५ दुग्ध संयंत्रों की क्षमता ४.७० लाख लीटर से बढ़ाकर ८.८० लाख लीटर प्रतिदिन कर दिया है। वित्तवर्ष मार्च, २०१३ तक घी की कुल बिक्री ४२०४ मीट्रिक टन रही। विभिन्न नगरों व कस्बों में लगभग ३५४ दुग्ध बूथों की स्थापना की गई है। वर्ष २०१२-१३ के दौरान प्रसंघ का कुल टर्न ओवर ९५८ करोड़ रूपये का रहा। हरियाणा में वर्ष १९६६ में कुल मछली उत्पादन ६०० टन था, वहीं वर्ष २०१०-११ में ९४००० टन की बढ़ौतरी दर्ज की गई। मत्स्य पालन में वर्ष २०१०-११ में प्रति इकाई देशभर में हरियाणा को दूसरा स्थान हासिल हुआ। इस समय हरियाणा में २० मत्स्य स्वास्थ्य सुरक्षा, १४ जलचर पॉलीक्लिनिक तथा राज्य स्तर पर एक जांच प्रयोगशाला खोली गई है।
हरियाणा प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। हरियाणा की साक्षरता दर में सराहनीय बढ़ौतरी दर्ज हुई है। जब वर्ष १९६६ में हरियाणा अस्तित्व में आया, उस समय हरियाणा की साक्षरता दर मात्र २० प्रतिशत ही थी। वर्ष २००१ में प्रदेश की साक्षरता दर ६७.९ प्रतिशत थी, जोकि वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार यह बढक़र ७५.६ हो गई है। महिला साक्षरता दर भी ५५.७ प्रतिशत से बढक़र ६५.९ प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ौतरी दर्ज की गई है। हरियाणा में गत आठ वर्षों के दौरान प्रदेश में विश्वविद्यालयों की संख्या ८ से बढक़र ३६ हो चुकी है। इस समय प्रदेश में ६६२ तकनीकी संस्थानों के अतिरिक्त ७०१ सरकारी और निजी महाविद्यालय हैं। इस दौरान प्रदेश में ३५ नए राजकीय महाविद्यालय और ५०१ नए तकनीकी संस्थान खोले गए है।  प्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लगभग १२ लाख विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विश्व स्तरीय शिक्षा केन्द्र के रूप में राजीव गांधी एजुकेशन सिटी स्थापित की जा रही है, जिसमें १.५ लाख छात्र एक साथ पढ़ाई कर सकेंगे। यह एजुकेशन सिटी उच्चतर शिक्षा और नैनो टैक्नोलोजी, बॉयो टैक्नोलोजी और जैनिटिक्स जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान का एक प्रमुख केन्द्र बनेगी। यहां पर स्थापित किये जा रहे प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की तर्ज पर होंगे। प्रदेश में वर्ष २००५ की केवल ३५० सीटों की तुलना में इस समय सरकारी और निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस की कुल ८०० सीटे हैं। हरियाणा ऐसा पहला राज्य है जो अनुसूचित जाति और बीपीएल परिवारों के लगभग २० लाख गरीब विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां दे रहा है।
 हरियाणा के गठन के समय वर्ष १९६६ में मात्र ६ बहुतकनीकी संस्थान (चार राजकीय और दो सरकारी सहायता प्राप्त) और एक इंजीनियरिंग संस्थान था, जिनमें दाखिला लेने की वार्षिक क्षमता १३४१ विद्यार्थियों की थी। जबकि शैक्षणिक सत्र २०१२-१३ में १,४३,००० सीटों के साथ संस्थानों की कुल संख्या बढक़र ६४३ हो गई है। वर्ष १९६६ में हरियाणा में ७१५६ सीटों के साथ ४८ राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान थे। आज प्रदेश में औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग शिल्पकार प्रशिक्षण के तहत १३१ राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और ९४ निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं। वर्ष २०१२-१३ के दौरान राजकीय औद्योगिक शिल्प संस्थानों में उत्कृष्टता केन्द्रों सहित २५०५ ट्रेडों में ३९१६८ स्वीकृत सीटें थीं तथा निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में १४४१६ सीटें थीं। १२वीं पंचवर्षीय योजना के लिए राज्य में १६.७५ लाख लोगों को औद्योगिक प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
रचनात्मक कलाओं को प्रोत्साहन देने के लिए रोहतक में फैशन डिजायन, फिल्म एवं टेलीविजन और फाईन आर्ट्स के राज्य संस्थान स्थापित किए जा चुके हैं। शिक्षा की उच्च गुणवता के लिए प्रदेश सरकार द्वारा सोनीपत जिले के खानपुर कलां में महिला विश्वविद्यालय, महेन्द्रगढ़ जिले में केन्द्रीय विश्वविद्यालय, रोहतक में स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और हिसार में पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय खोले गये हैं। इसके साथ ही रोहतक में आईआईएम, गुडगाँव के बिनौला गाँव में देश का प्रथम रक्षा विश्वविद्यालय, मीरपुर में इन्दिरा गांधी विश्वविद्यालय, सोनीपत जिले के राई में राजीव गांधी एजुकेशन सीटी स्थापित की जा रही है। कुरूक्षेत्र जिले के उमरी गाँव में राष्ट्रीय डिजाय संस्थान खोला जा रहा है, जोकि उत्तरी भारत का एकमात्र संस्थान होगा। यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर का संस्थान होगा और इसकी स्थापना में जापान तकनीकी सहायता देगा। पंचकूला जिले के मानकपुर गाँव में नेशलन इंस्टीच्यूट ऑफ फैशन टैक्नोलोजी स्थापित किया जाएगा, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैशन प्रशिक्षण दिया जाएगा। सोनीपत में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है। औद्योगिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जीन्द जिले में हरियाणा इंस्टीच्यूट ऑफ एजुकेशन ट्रेनिंग एण्ड रिसर्च स्थापित किया जा रहा है। एनसीआर क्षेत्र के लोगों के लिए गुडगाँव में एक नया विश्वविद्यालय खोला जा रहा है। झज्जर जिले में स्थापित आईआईटी का विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश के तकनीकी शिक्षण सस्थानों में १.२१ लाख सीटों की बढ़ौतरी भी की गई है। झज्जर जिले के मातनहेल गाँव में पुलिस यूनिवर्सिटी स्थापित करना प्रस्तावित किया गया है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में हरियाणा ने बड़ी तेजी से उन्नति की है। इस समय हरियाणा में तीन नए मैडीकल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। इनमें मेवात जिले में नल्हड़ मैडीकल कॉलेज, करनाल में कल्पना चावला मैडीकल कॉलेज और झज्जर के बाढ़सा में एम्स-दो शामिल है। इससे पूर्व रोहतक में पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की जा चुकी है। इसके साथ ही हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्य है, जहां प्रत्येक स्वास्थ्य केन्द्र पर वाहनों की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इनके अलावा, राज्य में एंडवांस लाईफ स्पोर्ट सिस्टम एंबुलेंस सुविधा भी शुरू की गई है, जोकि दिनरात सेवा में तत्पर रहती है। निश्चित तौरपर इन्हें चिकित्सा के क्षेत्र में हरियाणा प्रदेश की अभूतपूर्व उपलब्धि कहा जा सकता है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र प्रदेश की प्राथमिक सूची में शामिल है।
हरियाणा में वर्ष २००५-०६ में मातृ-मृत्यु दर १८६ थी, जोकि घटकर १५३ रह चुकी है। अब इसे मात्र दो अंकों में लाने के लिए कमर कसी जा चुकी है। वर्ष २००२ में शिशु मृत्यु दर १००० के मुकाबले ६१ थी, जोकि वर्ष २०१० के आते-आते ४८ ही रह गई है। संस्थागत प्रसूतियों का ग्राफ ८३ प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इस समय प्रदेश में आर्थिक पैकेज के तहत १५०० करोड़ रूपये की स्वास्थ्य परियोजनाओं पर काम चल रहा है। पीएनडीटी एक्ट का सख्ती से लागू करने के परिणामस्वरूप प्रदेश के लिंगानुपात में भी सुधार आया है। वर्ष २००१ की जनगणना के अनुसार प्रदेश का अनुपात ८६१ था, जोकि १८ अंकों के सुधार के साथ वर्ष २०११ की जनगणना के मुताबिक ८७७ हो गया है। पीएनडीटी अधिनियम के तहत अब तक २५ चिकित्सकों को सजा दी जा चुकी है और ३७७ अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों का पंजीकरण निलंबितध्रद्द किया जा चुका है। इसके साथ ही १७७ अल्ट्रासाउण्ड मशीनें पकड़ी जा चुकी हैं। कन्या-भ्रण हत्या को रोकने में उल्लेखनीय एवं अनुकरणीय पहल करने वाले जीन्द जिले के बीबीपुर गाँव की पंचायत को एक करोड़ रूपये की धनराशि से सम्मानित किया गया है।
हरियाणा ने खेलों के क्षेत्र में भी अपना परचम फहराया है। वर्ष २०१२ के लन्दन ओलम्पिक खेलों में भारत ने कुल छह पदक जीते, जिनमें से चार पदक हरियाणा के होनहार खिलाडियों ने अपने नाम किए। वर्ष २००८ के बीजिंग ओलम्पिक खेलों में भी हरियाणा के खिलाडियों ने तीन में से दो पदक अपने नाम किए थे। इस समय हरियाणा में दो राज्य स्तरीय स्टेडियम, २१ जिला स्तरीय स्टेडियम व २२१ छोटे स्टेडियम हैं। इसके साथ ही २२६ नए ब्लॉक स्तरीय स्टेडियमों का निर्माण होने वाला है। सरकार द्वारा चालू वित्तवर्ष के दौरान खेल बजट को बढ़ाकर तीन गुना यानि १०७ करोड़ किया जा चुका है। हरियाणा सरकार की खेल नीति श्पदक लाओ, पद पाओ्य के तहत वर्ष २००५ से लेकर अब तक ४२४ से अधिक खिलाडियों को योग्यतानुसार नौकरियां भी दी चुकी हैं। राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक लाने वाले खिलाडियों को पदो ंके साथ-साथ भारी धनराशि से भी पुरस्कृत किया जा रहा है। लन्दन ओलम्पिक विजेता खिलाडियो को करोड़ों रूपये की धनराशि एवं उपहार हरियाणा सरकार ने दिल खोलकर दिए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने वर्ष २०१६ में रियोल (ब्राजील) में होने वाले ओलम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को ५ करोड़ रूपये, रजत पदक विजेता को ३ करोड़ रूपये और कांस्य पदक विजेता को २ करोड़ रूपये की धनराशि देने की घोषणा की है। हरियाणा सरकार की खेल एवं शारीरिक योग्यता परीक्षण (स्पैट) योजना के तहत नए होनहार खिलाडियों को खोजने व उन्हें आगे बढ़ाने में बेहद कामयाब हो रही है। हरियाणा सरकार ने खेल की आधारभूत संरचना, उभरते खिलाडियों की प्रतिभा को विकसित करने के उद्देश्य से वर्ष २०१० में श्स्पेट्य योजना शुरू की। इस योजना के तहत वर्ष २०१० में १६०६, वर्ष २०११ में ४९९६, वर्ष २०१२ में ५००० और वर्ष २०१३ में ५००० प्रतिभाशाली खिलाडियां का चयन किया गया।
हरियाणा में २ राज्य स्तरीय खेल स्टेडियम, ५ हॉकी एस्ट्रोटर्फ तथा ३ सिंथेटिक टै्रक, १३ उपमण्डल स्तर के खेल स्टेडियम, ९ स्विमिंग पुल तथा ६ बहुद्देशीय हॉल निर्मित किए गए हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा हॉकी के लिए हिसार में एस्ट्रोटर्फ, फुटबाल के लिए दरियापुर (फतेहाबाद) में सिंथेटिक सरफेस खेल मैदान तथा महम में मुक्केबाजी एवं कुश्ती के लिए खेल प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। कुरूक्षेत्र जिले के शाहाबाद में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हॉकी अकादमी स्थापित की जा रही है।
हरियाणा प्रदेश में सडक एवं परिवार के क्षेत्र में बेहद प्रगति की है। हरियाणा के निर्माण के समय वर्ष १९६६ में कुल ४७५ बसें ही थीं, जोकि वर्ष २०१२ में बढक़र ३४९० हो गई हैं। परिवहन के बेड़े में बहुत जल्द ४००० नई बसें शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार के सहयोग से हरियाणा प्रदेश दिल्ली की मैट्रो से जुडने जा रहा है। दिल्ली-मैट्रो का विस्तार फरीदाबाद तक और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे मैट्रो स्टेशन से गुडगाँव तक और मुंडका (दिल्ली) से बहादुरगढ़ तक किया जा रहा है।
हरियाणा ने आर्थिक क्षेत्र में खूब तरक्की की है। हरियाणा ने ११वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान वित्तीय संशाधन जुटाने में देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। ११वीं पंचवर्षीय योजना के लिए योजना आयोग द्वारा गठित समूह ने दर्शाया है कि राष्ट्रीय औसत के अनुसार राज्यों ने ११वीं पंचवर्षीय योजना में अनुमानित संशाधनों का ९२.५ प्रतिशत जुटाया, जबकि हरियाणा ने अनुमानित संशाधनों का १९२ प्रतिशत जुटाने में सफलता हासिल की। अग्रिम अनुमानों के अनुसार वर्ष २०१२-१३ के लिए स्थिर कीमतों पर सकल घरेलू उत्पादा १९१८२०.७६ करोड़ रूपये है, जबकि तीव्र अनुमानों के अनुसार वर्ष २०११-१२ में यह १७९०९७ करोड़ रहा, जो वर्ष २०१२-१३ के लिए ७.१ प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि दर राष्ट्रीय स्तर पर अनुमानित ५ प्रतिशत से अधिक है। वर्ष २०१२-१३ में चालू कीमतों पर राज्य की प्रति व्यक्ति आय १,२३,५५४ रूपये आंकी गई है। यह वृद्धि १३.३ प्रतिशत है। वर्ष २०१३-१४ के दौरान ४३७८०.३३ करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्ति का अनुमान है, जो संशोधित अनुमान २०१२-१३ से १५.३५ प्रतिशत अधिक है। राजस्व कर २८७८४.३४ करोड़ रूपये है, जो संशोधित अनुमान २०१२-१३ से १८.५० प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वैट से १७.२६ प्रतिशत और आबकारी शुल्क में ३३.३३ प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। राजस्व खर्च १२.७७ प्रतिशत की वृद्धि के साथ ४६२२३.५६ करोड़ होने का अनुमान है।
हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं को वर्ष २००४-०५ में जहां प्रतिदिन ५७८ लाख यूनिट बिजली दी जा रही थी, वहीं वर्ष २०११-१२ में  प्रतिदिन १००९ लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति दी जा रही है। वर्ष २००४-०५ के दौरान कृषि क्षेत्र को २९१ लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली दी जा रही थी, वहीं वर्ष २०११-१२ में इसे बढ़ाकर ३९४ लाख यूनिट प्रतिदिन कर दिया गया है। वर्ष २०११-१२ में हरियाणा में स्वयं द्वारा उत्पादित बिजली बढकर ४३९०.५ मेगावॉट तक पहुंच चुकी है। जबकि, वर्ष २००४-०५ में यह मात्र १५८७.७ मेगावाट ही थी। झज्जर जिले के खानपुर गाँव में १३२० मेगावाट कोयले पर आधारित महात्मा गांधी सुपर थर्मल पावन प्लांट लगभग ६००० करोड़ रूपये की लागत से स्थापित किया गया है। यह प्रदेश की पहली बिजली इकाई है जो नवीनतम आधुनिक सुपर क्रिटिकल प्रोद्यौगिकी पर आधारित है। फतेहाबाद के गोरखपुर में २८०० मेगावाट बिजली परमाणु संयत्र की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। पिछले आठ वर्षों में ३४० नए सब स्टेशन बनाये गए हैं और ५७४ सब स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई गई है। संप्रेषण तंत्र के उन्नयन के लिए वर्ष २०१२-१३ व वर्ष २०१३-१४ के दौरान १८०० करोउ़ रूपये की योजना है। इन सब तथ्यों से सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि हरियाणा बहुत जल्द बिजली के मामले में पूर्ण रूप से आत्म-निर्भर राज्य बनने वाला है।
हरियाणा ने अस्तित्व में आने के बाद वाणिज्य एवं उद्योग में भी बड़ी उल्लेखनीय प्रगति की है। अब कृषि प्रधान हरियाणा प्रदेश देश के सर्वाधिक उद्योग वाले राज्यों में गिना जाने लगा है। प्रदेश में १३५९ बड़ी एवं मध्यम औद्योगिक इकाईयां स्थापित हैं और ६५१० लघु एवं सूक्ष्म उद्योग सफलता की नई कहानियां लिख रहे हैं। इनमें ७.६५ लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है और प्रदेश को १०,३५,११९ लाख रूपये का निवेश प्राप्त हुआ है। निवेशकों की नजर में हरियाणा प्रदेश सबसे पसन्दीदा प्रदेश बना है। हरियाणा में वर्ष २००५ के दौरान कुल ५९ हजार करोड़ रूपये का निवेश हुआ था, वहीं इस समय यह निवेश लगभग ९६ हजार करोड़ के आंकड़े को छूने को बेताब है। हरियाणा प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति ने अप्रत्याशित परिणाम देने शुरू कर दिये हैं। इस नीति के तरत प्रदेश भर में नये औद्योगिक मॉडल टाऊनशिप (आईएमटी) स्थापित किये जा रहे हैं। गत सात वर्षों के दौरान १०८ बड़े और मध्य स्तर के उद्योग एवं १४३३६ लघु स्तर के उद्योग लगे हैं। सूचना प्रोद्यौगिकी के निर्यात में भी हरियाणा देश में अग्रणी स्थान रखता है। यहां से २३००० करोड़ रूपये का निर्यात किया जा चुका है। विश्व सूचना प्रोद्योगिकी बीपीओ कार्यबल का चार प्रतिशत अकेले गुडगाँव जिले से है।
गत जुलाई, २०१३ में हरियाणा के भिवानी व महेन्द्रगढ़ जिले एनसीआर क्षेत्र में शामिल करने के बाद विकास की एक और नई ईबारत लिखे जाने की भूमिका तैयार हो चुकी है। इन दो जिलों के एनसीआर में शामिल होने से हरियाणा उपक्षेत्र का कुल क्षेत्र १३,४२८ वर्ग किलोमीटर से बढक़र २०,१०५ वर्ग किलोमीटर हो गया है, जोकि राज्य के कल क्षेत्र का ४५.४७ प्रतिशत है।
हरियाणा का सैन्य योगदान एक अद्भूत मिसाल के तौरपर लिया जाता है। इतिहास साक्षी है कि हरियाणा के वीर सूरमा सेनाओं में भर्ती होकर राष्ट्र की स्वतंत्रता, एकता, अखण्डता एवं उसकी अस्मिता की रक्षा के लिए हमेशा तन-मन-धन से समर्पित रहे हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भी इस प्रदेश के रणबांकुरे सेना में भर्ती होकर देश के प्रहरी की सशक्त भूमिका निभा रहे हैं। देश की सशस्त्र सेनाओं में चाहे वह जाट रेजीमेंट हो या फिर ग्रेनेडियरर्ज, राजपुताना राईफल्स हो या कुमाऊं रेजीमेंट, राजपूत रेजीमेन्ट हो या अन्य कोई टुकड़ी, सभी जगह हरियाणा के रणबांकुरों की उपस्थिति अहम् मिलेगी। अगर अभी तक के युद्धों पर नजर डालें तो पाएंगे कि हरियाणा के शूरवीर सभी युद्धों में अग्रणी रहे हैं। आंकड़े गवाह हैं कि हरियाणा देश की जनसंख्या का मात्र दो प्रतिशत है, फिर भी हरियाणा प्रदेश का सैन्य दृष्टि से योगदान कम से कम बीस प्रतिशत है। इसका अभिप्राय, देश की सेना का हर पाँचवा सिपाही हरियाणा की मिट्टी का लाला है। सैन्य पदकों के मामले में भी हरियाणा के रणबांकुरे तीसरे स्थान पर हैं। हरियाणा प्रदेश के लिए यह भी एक गौरवपूर्ण एवं ऐतिहासिक उपलब्धि है कि भिवानी जिले के गाँव बापौड़ा में जन्मे रणबांकुरे जनरल वी.के. सिंह भारतीय थल सेनाध्यक्ष के गौरवमयी पद को सुशोभित कर चुके हैं।
कुल मिलाकर, हरियाणा प्रदेश नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जिसे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहा जा रहा है। हरियाणा प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के लिए भारत सरकार द्वारा लगातार दो बार श्कृषि कर्मण पुरस्कार्य से नवाजा जा चुका है। हावर्ड बिजनेस स्कूल से सम्बद्ध इंस्टीच्यूट ऑफ कम्पेटिटिवनैस (आईएफसी) ने श्आईएफसी-मिंट स्टेट कम्पेटिटिवनैस अवार्ड-२०१२्य के लिए हरियाणा प्रदेश का चयन किया है। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रीन डिजायन-२०१२ के सम्मेलन में हरियाणा अक्षय उर्जा विभाग और हरेडा को श्एग्जेम्पलरी डेमोंस्ट्रेशन ऑफ इंटीग्रेशन ऑफ सोलर पैसिब फीजर अवार्ड्य से सम्मानित किया गया। हरियाणा लोकनिर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग को केन्द्र सरकार की निर्माण उद्योगिक विकास परिषद द्वारा श्विश्वकर्मा पुरस्कार्य से सम्मानित किया गया है। दी फैडरेशन ऑफ इण्डियन चौम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ने हरियाणा प्रदेश को श्वर्ष २०१२ का सर्वोत्कृष्ट खेल राज्य्य पुरस्कार से नवाजा। एनडीटीवी ने खेल प्रोत्साहन के क्षेत्र में हरियाणा को सर्वोत्कृष्ट राज्य का सम्मान दिया। उर्जा नवीनीकरण एवं संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा हरियाणा प्रदेश को वर्ष २०१०-११ के लिए दूसरे पुरस्कार से सम्मानित किया। सभी क्षेत्रों में विकास के लिए हरियाणा को श्फायनेंसियल इनक्लूजन अवार्ड-२०१२्य से सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही हरियाणा को अपनी संपत्ति, भू-अभिलेख एवं जमाबंदी मानचित्रण की गतिशील एकीकरण परियोजना के लिए सीएसआई-निहिलेंट ई-प्रशासन पुरस्कार २०११-१२ से नवाजा गया है। इस तरह से हरियाणा प्रदेश सफलता, समृद्धि और श्रेष्ठता की नित नई ईबारत गढ़ रहा है।
(लेखक राजेश स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक हैं।)   

(राजेश कश्यप)
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक।
स्थायी सम्पर्क सूत्ररू
राजेश कश्यप
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक
म.नं. १२२९, पाना नं. ८, नजदीक शिव मन्दिर,
गाँव टिटौली, जिला. रोहतक
हरियाणा-१२४००५
मोबाईल. नं. ०९४१६६२९८८९
e-mail : rajeshtitoli@gmail.com

(लेखक परिचयरू हिन्दी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में द्वय स्नातकोत्तर। दो दशक से सक्रिय समाजसेवा व स्वतंत्र लेखन जारी। प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में दो हजार से अधिक लेख एवं समीक्षाएं प्रकाशित। आधा दर्जन पुस्तकें प्रकाशित। दर्जनों वार्ताएं, परिसंवाद, बातचीत, नाटक एवं नाटिकाएं आकाशवाणी रोहतक केन्द्र से प्रसारित। कई विशिष्ट सम्मान एवं पुरस्कार हासिल।)

रविवार, 8 सितंबर 2013

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आदरणीय मित्रों ! ‘हिन्दी ब्लॉगिंग’ पर मेरे कुछ विचार ‘दैनिक जागरण’ की जागरण जंक्शन की ताजा प्रतियोगिता में प्रकाशित हुये हैं। क्या आप उस साईट पर अपनी प्रतिक्रिया देकर मुझे आगे बढ़ने में सहयोग कर सकते हैं? यदि हाँ तो कृपा करके लॉग इन करिये:

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सोमवार, 19 अगस्त 2013

नई प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी के कथित चुनाव एकदम गैर-कानूनी हैं - राजेश कश्यप

 नई प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी के कथित  चुनाव एकदम गैर-कानूनी हैं - राजेश कश्यप

राजेश कश्यप
आजकल हरियाणा कश्यप राजपूत सभा (रजि. नं. 184) की नई प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी के जो कथित चुनाव करवाने के समाचार मिल रहे हैं, वे एकदम गैर-कानूनी हैं और समाज विरोधी मानसिकता का परिचायक हैं। इसे सभ्य समाज बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करेगा। यह चेतावनी जारी करते हुए सभा के जिला प्रधान राजेश कश्यप, टिटौली ने आगे कहा कि इन चुनावों में कदम-कदम पर सभा के विधान का उल्लंघन किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये चुनाव जो लोग करवा रहे हैं, वे बिल्कुल अवैधानिक हैं और किसी तरह के चुनाव करवाना उनके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता है। क्योंकि कानूनी तौरपर सभा के वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष जय भगवान कश्यप द्वारा न तो नये चुनावों की घोषणा की गई है और न ही वर्तमान कार्यकारिणी को भंग किया गया है। ऐसे मंे विधान के खिलाफ नए चुनाव करवाना बहुत बड़ा कानूनी और सामाजिक अपराध है।
जिला प्रधान राजेश कश्यप ने आगे बताया कि कुछ लोग निजी स्वार्थपूर्ति के लिए एकदम गैर-कानूनी व असामाजिक काम कर रहे हैं और बिना किसी सार्वजनिक घोषणा और नियम का पालन किए गुपचुप तरीके से फर्जी (डम्मी) पदाधिकारी चुने जा रहे हैं और उनसे पैंसे ऐंठे जा रहे हैं। श्री कश्यप ने समाज के नाम पर जारी चेतावनी में कहा है कि कोई भी व्यक्ति विधान के खिलाफ चुनाव करवाने वाले स्वार्थी लोगों के बहकावे में न आये और उन्हें किसी भी तरह की कोई धनराशि न दे। यदि इसके बावजूद कोई ऐसा करेगा तो वह अपने नुकसान का स्वयं जिम्मेदार होगा। राजेश कश्यप ने आगे बताया कि जब भी वैधानिक तौरपर सभा की प्रदेश कार्यकारिणी के चुनाव होंगे, उसकी घोषणा सार्वजनिक तौरपर की जायेगी, मीडिया के माध्यम से भी सूचना दी जायेगी और निष्पक्ष चुनावों के लिए हर कायदे-कानून की सतत पालना की जायेगी।

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बुधवार, 14 अगस्त 2013

राष्ट्र-चिंतन / कहां खड़ा है हमारे शहीदों के स्वप्न का वतन? / -राजेश कश्यप

राष्ट्र-चिंतन
कहां खड़ा है हमारे शहीदों के स्वप्न का वतन? / -राजेश कश्यप

हमारे देशभक्त
हम स्वतंत्रता के साढ़े छह दशक पार कर चुके हैं। यह स्वतंत्रता महात्मा गांधी, सरदार भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, राजगुरू, सुखदेव, राम प्रसाद बिस्मिल, लाला लाजपतराय, उधम सिंह, खुदीराम बोस, बाल गंगाधर तिलक आदि न जाने कितने ही जाने-अनजाने देशभक्त क्रांतिकारियों की अनंत शहादतों, त्याग एवं कुर्बानियों का प्रतिफल है। हम कभी आजीवन उनके ऋणी रहेंगे। वे हमें एक आजाद वतन विरासत में देकर गए हैं। कहना न होगा कि हमारा मूल नैतिक दायित्व बनता है कि हम इस देश की स्वतंत्रता, एकता, अखण्डता एवं उसकी अस्मिता को अक्षुण्ण बनायें रखें और इस देश को वो गरिमा और आभा प्रदान करें, जो कभी हमारे शहीद देशभक्तों एवं स्वतंत्रता सेनानी स्वप्न रखते थे। स्वतंत्रता के इन 66 वर्षों में हम अपने शहीदों के स्वप्नों पर कितना खरा उतर पाये हैं, क्या कभी हमने सोचा है? जो स्वप्न हमारे शहीदों और क्रांतिकारियों ने फांसी के फंदों पर झूलते समय या काले पानी की सजा को झेलते समय या फिर क्रूर अंग्रेजों के दमन चक्र में पिसते हुए देखा था, क्या उस स्वप्न को साकार कर दिखाया है? इसमें कोई दो राय नहीं है कि सवाल जितना सहज है, जवाब उतना ही असहज! ऐसा क्यों? स्पष्ट है कि हम अपने शहीदों और क्रांतिकारियों के स्वप्न को साढ़े छह दशक बाद भी पूरा नहीं कर पाये हैं। जी हाँ यही कटू सत्य है और यही सबसे बड़ी विडम्बना।
यदि हम स्वतंत्रता के गत साढ़े छह दशकों का ईमानदारी से मूल्यांकन करें तो खुशी कम और गम अधिक नजर आता है। देश की गौरवमयी उपलब्धियों पर वर्तमान विकट चुनौतियां हावी नजर आती हैं। बेहद विडम्बना का विषय है कि आज हमारे देश के समक्ष राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक आदि लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में विकट एवं विषम चुनौतियां खड़ी हो चुकी हैं और धीरे-धीरे यह नासूर बनती चली जा रही हैं। राजनीतिकों के घपलों, घोटालों और भ्रष्टाचार की अनंत प्रवृत्तियों ने देश को रसातल में पहुंचाने का काम किया है। स्वतंत्रता के इन साढ़े छह दशकों में कई लाख करोड़ के घोटालों को अंजाम दिया है और कई हजार करोड़ रूपया विदेशों में काले धन को जमा किया है। इन्हीं सबके चलते देश पर दिसम्बर, 2012 तक 22.57 लाख करोड़ रूपये विदेशी कर्ज का बोझ बढ़ चुका है और रूपया डॉलर के मुकाबले रिकार्ड़ सबसे निम्न स्तर पर पहुंच चुका है। उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के समय एक रूपये की कीमत एक डॉलर के बराबर थी। लेकिन, स्वतंत्रता के 66 वर्षों के बाद एक रूपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 6000 प्रतिशत से भी नीचे गिरकर 61 रूपये से भी अधिक रिकार्ड़ निम्न स्तर तक पहुंच चुकी है। गरीबी, भूखमरी, बेकारी, बेरोजगारी और मंहगाई का ग्राफ आसमान को छू रहा है।  राजनीतिकों की धर्म, जाति, मजहब और क्षेत्रवाद की राजनीति ने देश के सामाजिक तंत्र को जर्जर बनाने का काम किया है।
देश की गरिमापूर्ण संसद और विधानसभाओं में जनप्रतिनिधि के मुखौटे पहनकर अपराधियों ने भारी घूसपैठ कर चुके हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्मस (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार देश में पिछले 10 साल के दौरान संसद और विधानसभाओं का चुनाव लड़ने वाले 62847 उम्मीदवारों में से 11063 ‘अपराधी’ जनप्रतिनिधि बनने में कामयाब हुए हैं। इन 11063 अपराधी उम्मीदवारों में से 5233 के खिलाफ तो बेहद गंभीर अपराधिक मामले दर्ज हैं। एडीआर के अनुसार देश की लोकसभा के 30 प्रतिशत अर्थात् 543 सांसदों में से 162 सांसदों के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी तरह राज्यसभा के 232 सांसदों मेंसे 40 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से सोलह के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जोकि इनके सदस्य संख्या का 18 फीसदी बनता है। निश्चित तौरपर ये आंकड़े भारतीय अस्मिता और सम्मान की प्रतीक संसद पर बेहद बदनुमा काले दागों के समान हैं। जिस देश की सर्वोच्च संस्था में ‘जनप्रतिनिधियों’ के लिबास में आपराधिक छवि के बड़ी संख्या में बैठे हैं, भला उससे बढ़कर देश के लिए और अन्य विडम्बना क्या हो सकती है? केवल देश की सर्वोच्च संस्था संसद में ही नहीं, राज्यों की विधानसभाओं में भी आपराधिक छवि वाले नेताओं की भरमार है। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार देश के वर्तमान 4032 विधायकों में से 1258 विधायकों ने अपने हलफनामों में स्वयं पर आपराधिक मामले दर्ज होना स्वीकार किया है। कितनी बड़ी विडम्बना है कि हमारे देश के 31 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और इनमें से 15 फीसदी विधायकों पर तो अत्यन्त गम्भीर किस्म के आपराधिक मामले दर्ज हैं। गजब की बात तो यह है कि देश के शीर्ष राजनीतिक दलों में भी अपराधिक छवि वाले नेताओं की भरमार है।
सरकार का कहना है कि अब मात्र 22 फीसदी लोग ही गरीब रह गये हैं। जबकि सच्चाई इसके कोसों दूर है। सरकार द्वारा एन.सी.सक्सेना की अध्यक्षता में गठित एक विशेषज्ञ समूह ने 2400 कैलोरी के पुराने मापदण्ड के आधार पर बताया था कि देश में बीपीएल की आबादी 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। विश्व बैंक के अनुसार भारत में वर्ष 2005 में 41.6 प्रतिशत लोग गरीबी की रेखा से नीचे थे। एशियाई विकास बैंक के अनुसार यह आंकड़ा 62.2 प्रतिशत बनता है। वैश्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार भारत में अतिरिक्त अनाज होने के बावजूद 25 प्रतिशत लोग अब भी भूखे हैं। अंतर्राष्ट्रीय अन्न नीति अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार भारत 79 देशों में भूख और कुपोषण के मामले में 65वें स्थान पर है। इसके साथ ही भारत में 43 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं, जिसे देखते हुए भारत का रैंक नाईजर, नेपाल, इथोपिया और बांग्लादेश से भी नीचे है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 70 प्रतिशत भारतीय महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं और देशभर के पिछड़े इलाकों व झुग्गी-झांेपड़ियों में रहने वाली लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं तथा लड़कियां गंभीर रूप से खून की कमी का शिकार हैं। युनीसेफ द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार कुपोषण की वजह से वैश्विक स्तर पर 5 वर्ष तक के 48 प्रतिशत भारतीय बच्चे बड़े पैमाने पर ठिगनेपन का शिकार हुए हैं। इसका मतलब दुनिया में कुपोषण की वजह से ठिगना रहने वाला हर दूसरा बच्चा भारतीय है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा सूचकांक (जीएफएसटी) के मुताबिक भारत में 22 करोड़ 46 लाख लोग कुपोषण का शिकार हैं। भारत की 68.5 प्रतिशत आबादी वैश्विक गरीबी रेखा के नीचे रहती है। भारत में करीब 20 प्रतिशत लोगों को अपने भोजन से रोजाना औसत न्यूनतम आवश्यकता से कम कैलोरी मिलती है। इस रिपोर्ट में भारतको 105 देशों की सूची में 66वें पायदान पर रखा गया है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग की रिपोर्ट कहती है कि खाद्यान्न की मंहगाई की वजह से भारत में वर्ष 2010-11 के दौरान 80 लाख लोग गरीबी की रेखा से बाहर नहीं निकल पाये।
गरीबी के दंश की मार को महसूस करने के लिए बेरोजगारी और बेकारी के आंकड़ों को नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता। कहना न होगा कि बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार के कारण देश में बेरोजगारी व बेकारी का ग्राफ बड़ी तेजी से बढ़ा है। आवश्यकतानुसार न तो रोजगारों का सृजन हुआ और न ही रोजगार के स्तर को स्थिर बनाये रखने में कामयाब रह सके। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009-10 में सामान्य स्थिति आधार पर बेरोजगार एवं अर्द्धबेरोजगार लोगों की संख्या क्रमशः 95 लाख और लगभग 6 करोड़ थी। इस कार्यालय के अनुसार जून, 2010 से जून, 2012 के बीच बेरोजगारी में बेहद वृद्धि हुई है। इन दो सालों में देश में पूर्ण बेरोजगारों की संख्या 1.08 करोड़ थी, जबकि दो साल पहले यह आंकड़ा 98 लाख था। दूसरी तरफ, योजना आयोग के आंकड़े बताते हैं कि देश में कुल 3.60 करोड़ पूर्ण बेरोजगार हैं। इसके अलावा, यदि अन्य संस्थाओं और संगठनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह पूर्ण बेरोजगारों की संख्या 5 करोड़ के पार पहुंच जाती है। एसोचैम सर्वेक्षण कहता है कि देशभर में पिछले साल की तुलना में 14.1 प्रतिशत नौकरियां कम हो गई हैं।
गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी और बेकारी के कारण स्वतंत्रता के साढ़े छह दशक बाद भी बड़ी संख्या में लोग रोटी, कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित हैं। आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय का अनुमान है कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार वर्ष 2012 में करीब 1.87 करोड़ घरों की कमी है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी एक संबोधन के दौरान गरीबों की दयनीय हालत को आंकड़ों की जुबानी बता चुके हैं कि देश की करीब 25 प्रतिशत शहरी आबादी मलिन और अवैध बस्तियों में रहती है। पेयजल एवं स्वच्छता राज्यमंत्री संसद में लिखित रूप मंे यह स्वीकार कर चुके हैं कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 16.78 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 5.15 करोड़ परिवारों के पास ही शौचालय की सुविधा है और शेष 11.29 प्रतिशत परिवार आज भी शौचालय न होने की वजह से खुले में शौच जाने को विवश हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 120 लीटर पानी मिलना चाहिए। लेकिन, देश की राजधानी दिल्ली में ही 80 प्रतिशत लोगों को औसतन सिर्फ 20 लीटर पानी ही बड़ी मुश्किल से नसीब हो पाता है। नैशनल क्राइम रेकार्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक गरीबी और कर्ज के चलते देश में प्रतिदिन 46 किसान आत्महत्या करते हैं।
सबसे बड़ी चिंता का विषय तो यह है कि देश की आन्तरिक एवं बाह्य सुरक्षा भी खतरे में है और हमारे राजनीतिक संकीर्ण एवं गैर-जिम्मेदारीना राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं। देश में आतंकवादी घटनाएं जब-तब घटती रहती हैं और सत्तारूढ़ सरकारें आतंकवाद पर काबू पाने के लिए कभी पोटा लागू करके हटाती हैं तो कभी एनसीटीसी (राष्ट्रीय आतंक रोधी केंन्द्र) के मुद्दे पर नूराकुश्ती को अंजाम देती हैं। इसके साथ ही अब तो आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ बाहरी सुरक्षा पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े होने लगे हैं। देश की सरहदें भी खतरे में पड़ने लगी हैं। कभी चीन देश की सीमाओं में घुसकर अपने तंबू गाड़ लेता है तो कभी पाकिस्तान की सेना बहुरूपिया बनकर हमारे जवानों का सिर काट ले जाती है। कभी बांग्लादेश से घूसपैठ बढ़ती है तो कभी श्रीलंका से वैचारिक तीखे मतभेद उभरकर सामने आते हैं। कहने का अभिप्राय आज देश अपने पड़ौसी देशों के कूटनीतियों और षड़यंत्रों के चक्रव्यूह में निरन्तर फंसता चला जा रहा है। सबसे घातक बात तो यह है कि हमारे राजनेताओं ने अपने उत्तरदायित्वों, नैतिकताओं और जिम्मेदारियों को तिलांजलि देते हुए सेना के जवानों की शहादतों पर भी शर्मनाक बयान देने शुरू कर दिये हैं। ये सब समीकरण देश की गरिमा और शान के नित्तांत खिलाफ हैं और भविष्य में बेहद घातक परिणाम लाने वाले हैं। निःसंदेह ऐसे वतन की कल्पना तो हमारे देशभक्त शहीदों, क्रांतिकारियों और बलिदानियों ने कदापि नहीं की होगी। निश्चित तौरपर यह सब, हम 125 करोड़ लोगों के लिए बेहद शर्म और धिक्कार का विषय है।

(लेखक राजेश स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक हैं।)   



स्थायी सम्पर्क सूत्र:
राजेश कश्यप
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक
म.नं. 1229, पाना नं. 8, नजदीक शिव मन्दिर,
गाँव टिटौली, जिला. रोहतक
हरियाणा-124005
मोबाईल. नं. 09416629889
e-mail : rajeshtitoli@gmail.com

(लेखक परिचय: हिन्दी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में द्वय स्नातकोत्तर। दो दशक से सक्रिय समाजसेवा व स्वतंत्र लेखन जारी। प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में दो हजार से अधिक लेख एवं समीक्षाएं प्रकाशित। आधा दर्जन पुस्तकें प्रकाशित। दर्जनों वार्ताएं, परिसंवाद, बातचीत, नाटक एवं नाटिकाएं आकाशवाणी रोहतक केन्द्र से प्रसारित। कई विशिष्ट सम्मान एवं पुरस्कार हासिल।)

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

संशोधित विधान पर आपके विचार एवं सुझाव आमंत्रित हैं

संशोधित विधान पर आपके विचार एवं सुझाव आमंत्रित हैं

परम आदरणीय मित्रो, सादर नमस्कार।

मित्रो ! हरियाणा कश्यप राजपूत सभा (रजि. 184) के मूल विधान में कुछ संशोधन प्रस्तावित किये गये हैं, जोकि आपकी सेवा में प्रस्तुत हैं। ये संशोधन मूल विधान में ही ‘रेखांकित/अंडर लाईन’ (Under Line) करके दर्शाये गये हैं। यह ‘प्रथम संविधान संशोधन, 2013’ के अन्तर्गत विचारार्थ रखे गये हैं, जिनके मूल उद्देश्य इस प्रकार हैं :

1. सभा के मूल विधान की कुछ खामियों और धाराओं की अस्पष्टता के चलते सभा के संचालन में आ रही परेशानियों को दूर करना।
2. सभा के कार्यों और समाज के प्रति उत्तरदायित्वों में पारदर्शिता लाना।
3. पदाधिकारियों को अनुशासनबद्ध बनाना और निरंकुश प्रवृत्ति से बचाना। साथ ही इन सभी पदाधिकारियों का सम्मान सुनिश्चित करना।
4. सभा को संभावित आपातकाल/विकट/विषम परिस्थितियों से बचाने के उपाय सुनिश्चित करना।
5. समाज के सर्वांगीण विकास, उन्नति, तरक्की एवं समृद्धि के लिए सभा की उपयोगिता बढ़ाना।

मित्रो! आपसे नम्र निवेदन है कि कृपा करके आप समाजहित में अपना थोड़ा सा समय निकालें और इन प्रस्तावित संशाधनों का अध्ययन करें। इसके बाद आप अपने अनमोल सुझावों और विचारों से लिखित रूप में पत्राचार/ईमेल/एसएमएस/फेसबुक आदि किसी भी विधि से अवगत करवाने का कष्ट करें। आपकी बड़ी मेहरबानी होगी। आपके जो भी विचार/सुझाव आयेंगे, उनका पूरा सम्मान होगा और सभा की आगामी राज्य स्तरीय बैठक में उन्हें रखा जायेगा। यदि आप उस बैठक में भाग लेने के इच्छुक हैं तो जरूर बताईयेगा, आपको सादर आमंत्रित किया जायेगा। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

राजेश कश्यप
जिला प्रधान, रोहतक।

पत्राचार का पता:
राजेश कश्यप,
प्रधान,
हरियाणा कश्यप राजपूत सभा रोहतक,
कश्यप भवन, पाना नं. 8, नजदीक शिव मन्दिर,
गाँव व डाकखाना. टिटौली,
जिला व तहसील. रोहतक
हरियाणा-124005

ईमेल: rajeshtitoli@gmail.com

मोबाईल नं. 09416629889

नोट: उपर्युक्त संविधान संशोधन की पीडीएफ फाईल के लिए अपना ईमेल देने वाले मित्रों को भेज दी गई है, जिनमें श्री देवेन्द्र निषाद, श्री संजीव कुमार, श्री राकेश कश्यप, श्री सुरेन्द्र सिंह कश्यप, श्री बलबी कश्यप, श्री ओम नारायण निषाद और श्री रमेश कुमार शामिल हैं। यदि आप भी ईमेल से इस संविधान संशोधन की पीडीएफ फाईल मंगवाना चाहते हैं तो कृपया अपना ईमेल मेरे मोबाईल नंबर पर भेजने अथवा नीचे कमेंट बॉक्स में लिखने का कष्ट करें। जल्द ही आपको ईमेल से पीडीएफ फाईल मिल जायेगी। धन्यवाद मित्रो। नमस्कार।
-: प्रस्तावित संशोधित विधान इस प्रकार है : - 








































शुक्रवार, 7 जून 2013

सादर आमंत्रण

सादर आमंत्रण

बुधवार, 5 जून 2013

पेड़ समस्त सृष्टि का आधार: राजेश कश्यप

पेड़ समस्त सृष्टि का आधार: राजेश कश्यप

-पौधारोपण अभियान का शुभारम्भ

5 जून, रोहतक।
‘‘पेड़ समस्त सृष्टि का आधार हैं। पेड़ लगाने का सीधा मतलब है सृष्टि का सृजन व संवृद्धन और पेड़ काटने का मतलब सृष्टि का संहार। इसलिए हमें बेहतर व समृद्ध भविष्य के निर्माण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिएं और एक पेड़ काटा जाये तो उसकी पूर्ति के लिए दो पौधे रोपने चाहिएं।’’ ये आह्वान हरियाणा कश्यप राजपूत सभा के जिला प्रधान राजेश कश्यप ने टिटौली गाँव में पौधारोपण कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए किया। 
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए आगे कहा कि बाढ़, भूकम्प, भूस्खलन, सूखा, असामयिक वर्षा, भयंकर गर्मी, सर्दी, तूफान आदि सब प्राकृतिक आपदाएं पर्यावरण प्रदूषण की ही देन हैं। इसका एकमात्र समाधान पौधारोपण है।
 श्री कश्यप ने समाज से गन्दगी पानी में बहाने, प्लास्टिक की थैलियां जलाने, खेतों में अंधाधूंध कीटनाशकों का प्रयोग करने जैसी व्यक्तिगत लापरवाहियों को छोड़ने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने पौधारोपण कार्यक्रम से बच्चों को जोड़ने और उन्हें मुफ्त में पौधे उपलब्ध करवाने की मुहिम चलाने की घोषणा भी की। 
इस अवसर पर दरियाव सिंह, महेन्द्र सिंह, श्रीमती कैलाशो देवी, पवन कश्यप, सुनील कुमार, सत्यवान कश्यप, बेबी स्वाती, सतीश कुमार, श्रीमती धौली, श्रीमती रामभतेरी, श्रीमती सीमा देवी, सूरज, मनोज कश्यप आदि उपस्थिति थे।

शुक्रवार, 24 मई 2013

शिक्षा, संघर्ष और संगठन किसी भी समाज के विकास का बुनियादी आधार : राजेश कश्यप

 शिक्षा, संघर्ष और संगठन किसी भी समाज के विकास का बुनियादी आधार : राजेश कश्यप
  शिक्षा, संघर्ष और संगठन किसी भी समाज के विकास का बुनियादी आधार है। हमें इस आधार को मजबूत करने के लिए दृढ़ संकल्प लेना होगा। इसके साथ ही हमें व्यसनों और सामाजिक कुप्रथाओं के चक्रव्युह को भी भेदना होगा’। ये आह्वान हरियाणा कश्यप राजपूत सभा के जिला प्रधान राजेश कश्यप ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में गाँव जिन्दरान में आयोजित ‘महर्षि कश्यप जयन्ती’ समारोह में उपस्थित लोगों से किया। श्री कश्यप ने सामाजिक सद्भावना और विकास पर जोर देने के साथ-साथ युवाओं को पथभ्रष्ट होने से बचने और कामयाबी हासिल करने के अपने विचार भी सांझा किए। उन्होंने कश्यप समाज के संघर्ष की प्रगति और भावी रूपरेखा रखने के अलावा महर्षि कश्यप पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि मोहम्मद जमालुद्दीन ने कहा कि हमें समाज में शांति और सौहार्द प्रगाढ़ करना चाहिए और नेक-नीयत से सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए। हरियाणा अम्बेडकर संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनजीत सिंह दहिया ने अपने संबोधन में कहा कि जब तक हम नशे की बुराईयों को नहीं छोड़ेंगे, शिक्षा पर जोर नहीं देंगे और एक-दूसरे का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक हम तरक्की हासिल नहीं कर सकते। समाजसेवी मनोहर लाल चांदीवाल ने कहा कि किसी भी समाज की धुरी युवा होते हैं। इसलिए युवाओं को आगे आना ही होगा। समारोह को महेन्द्र सिंह, जयभगवान कश्यप, सत्यवान कश्यप, रणबीर सिंह, धर्मेन्द्र कश्यप आदि ने भी संबोधित किया।

समारोह में मनजीत सिंह दहिया, मोहम्मद जमालुद्दीन, मनोहर लाल चांदीवाल आदि विशिष्ट अतिथियों के अलावा महेन्द्र सिंह, रणबीर सिंह, लछीराम, धर्मेन्द्र, श्रीभगवान, मनोज कश्यप, हरिराम, सत्यवान, जयभगवान, बिजेन्द्र, कृष्ण सुरेश, स्वाति, राजेश, प्रदीप, अजय आदि गणमान्य लोगों एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर सामाजिक शांति, सद्भावना और सौहार्द यज्ञ का आयोजन किया गया और वरिष्ठ गणमान्य लोगों व युवाओं ने आहुतियां डालीं। इसके साथ ही बुराईयों को त्यागने का संकल्प लिया। इस मौके पर भण्डारा भी लगाया गया।