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शनिवार, 30 जून 2012

हरियाणवी सिनेमा के लिए संजीवनी बनकर आई ‘तेरा मेरा वादा’


फिल्म समीक्षा / 
हरियाणवी सिनेमा के लिए संजीवनी बनकर आई ‘तेरा मेरा वादा’ 
-राजेश कश्यप
फिल्म ‘तेरा मेरा वादा’
गत शुक्रवार 29 जून को संगीतमयी प्रेम कहानी सुसज्जित फिल्म ‘तेरा मेरा वादा’ पिछले अढ़ाई दशक से मृतप्राय हो चुके हरियाणवी सिनेमा के लिए संजीवनी बनकर आई है। निःसंदेह हरियाणवी सिनेमा प्रेमियों के लिए इससे बढ़कर और अन्य कोई खुशखबरी हो ही नहीं सकती। वर्ष 1984 में प्रदर्शित ‘चन्द्रावल’ की अपार सफलता के बाद कोई भी हरियाणवी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई। हालांकि फिल्में तो निरंतर बनतीं रहीं, लेकिन सफलता का मुंह नहीं देख पाईं। अठाईस वर्षों बाद ढ़ेरांे उम्मीदांे का पिटारा भरकर गत 4 मई को चन्द्रावल की सिक्वल ‘चन्द्रावल-2’ आई और पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गई। निश्चित तौरपर एक लंबे समय के बाद हरियाणवी फिल्मों के प्रति सिने प्रेमियों में जो उत्साह बंधा था, वह बुरी तरह टूट गया था। ऐसे में आने वाली अन्य फिल्मों के प्रति भी दर्शकों में संशय पैदा हो गया था। लेकिन, इस संशय को चुनौती देते हुए भाल सिंह बल्हारा निर्देशित व अंकित सिंह और नीतू सिंह अभिनीत फिल्म ‘तेरा मेरा वादा’ ने बड़े पर्दे पर दस्तक दी। यह दस्तक की बजाय अप्रत्याशित जबरदस्त धमाका निकली।
‘तेरा मेरा वादा’ फिल्म एक लाजवाब फिल्म बन पड़ी है। हर दृष्टिकोण से फिल्म एकदम खरी उतरी है। निश्चित तौरपर यह फिल्म हरियाणवी सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर और एक नया स्वर्णिम अध्याय सिद्ध होगी। भाल सिंह बल्हारा के श्रेष्ठ निर्देशन में बनी ‘तेरा मेरा वादा’ फिल्म हॉलीवुड व बॉलीवुड की नवीनतम तकनीकों से ओतप्रोत है। प्राचीन व आधुनिक हरियाणवी परिवेश को जिस खूबसूरती के साथ फिल्म में समाहित किया गया है, वह वाकई काबिले तारीफ है। हरियाणा के प्रचलित हास्य-व्यंग्य विधा को फिल्म में एक नया आयाम मिला है। जानेमाने हास्य कलाकार जनार्दन शर्मा ने देहाती ताऊ के किरदार मंे जमकर हंसाया है और उभरते युवा हास्य कलाकार राजकुमार धनखड़ और सन्दीप ने अपनी अनूठी कॉमेडी से दर्शकों लोटपोट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 
फिल्म की कथा-पटकथा बेहद चुस्त है। लगभग सवा दो घण्टे की यह संगीतमयी प्रेम कहानी कब शुरू होती है और कब समाप्त हो जाती है, इसका तनिक भी दर्शकों को अहसास नहीं होता है। दर्शक फिल्म की धारा में इतनी सहजता से बहता चला जाता है कि उसे समय का कोई ध्यान ही नहीं रहता। फिल्म की कहानी में कोई झोल अथवा नीरसता बिल्कुल भी नहीं है। एक साधारण सी प्रेम कहानी को जिस असाधारण अन्दाज में फिल्माया गया है, वह अत्यन्त सराहनीय है। लंदन में तैयार संचित बल्हारा का संगीत बेहद उत्कृष्ट है। महफूज खान का संपादन, सुरेश पाहवा की सिनेमाटोग्राफी और मुक्ता चौधरी की डेªस डिजायनिंग की जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है। फिल्म के निर्माता रविन्द्र सिंह जे.डी. को यह फिल्म कदापि निराश नहीं करने वाली है। 
फिल्म के हर पात्र ने जीवन्त अभिनय करके हरियाणवी सिनेमा को अत्यन्त समृद्ध किया है। हॉलीवुड के स्टेल एडलर इंस्टीच्यूट मुम्बई से प्रशिक्षण प्राप्त युवा अभिनेता अंकित सिंह का बड़े पर्दे पर पदार्पण काफी दमदार रहा है। उनकी सहज व सधी अभिनय शैली, दमदार हरियाणवी संवाद बोलने का अन्दाज और आकर्षक चेहरा दर्शकों को सहज आकर्षित करता है। निश्चित तौरपर अंकित सिंह हरियाणवी सिनेमा क लिए एक बड़ी आस व संभावना बनकर उभरे हैं। मॉडल नीतू सिंह ने अपनी अनूठी संवाद अदायगी, सादगी, मासूमियत, चंचलता और गलैमर्स अदाओं के बलबूते दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी है। जर्नादन शर्मा का ठेठ देहाती अन्दाज बेमिसाल रहा। रामानंद सागर की प्रख्यात महाभारत में धृतराष्ट्र के किरदार को अमर बनाने वाले गिरिजा शंकर ने ग्रामीण पृष्ठभूमि के पुलिस कमिश्नर के रूप में प्रभावी भूमिका निभाई है। रादौर के शिवकुमार ने पंजाबी, हिन्दी व हरियाणवी नाटकों और धारावाहिकों से प्राप्त सारा अनुभव फिल्म में उड़ेलकर हरियाणवी सिनेमा के खलनायकी को एक नया आयाम दिया है। बसाना (कलानौर) के युवा अभिनेता मनोज राठी ने खलनायकी के उन शिखरों को बेहद सहजता से छुआ है, जिसे कई बार बड़े-बड़े कलाकार के लिए भी संभव नहीं हो पाता है। झज्जर के कासणी गाँव के युवा हास्य कलाकार राजकुमार धनखड़ अनूठी कॉमेडी के दमपर हरियाणवी सिनेमा में अपना अविस्मरणीय स्थान पक्का करवा लिया है। फूल सिंह उर्फ फूलिया के किरदार का तकिया कलाम ‘...कंपनी की तरफ तै’ दर्शकों को शुरू से लेकर अंत तक हंसी से लोटपोट किए रहता है। अन्य सभी कलाकारों ने भी काबिले-तारीफ अभिनय किया है और अपने किरदारांे के साथ पूरा-पूरा न्याय किया है।
बॉलीवुड का हर अन्दाज व मसाला इस फिल्म में परोसा गया है। फिल्म दमदार एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी, संगीत, गीत, संगीत, आईटम गीत, गलैमर्स, रोमांस, रोमांच आदि से भरपूर है। फिल्म में प्रचलित हरियाणवी मसखरी, मजाक, मुहावरे, लोकोक्तियां, लोकगीत, वेशभूषा, खेत-खलिहान, परंपरा, पकवान, तीज-त्यौहार, सभ्यता, संस्कृति, संस्कार और रीति-रिवाज आदि सब बस देखते ही बनते हैं।
फिल्म में गीत व रागनी फिल्म का उज्जवल पक्ष हैं। ‘चौगरदे नै बाग हरा...’ रागनी दर्शकों को झूमने के लिए विवश कर देती है। ‘हम हरियाणा आलै सैं, कुछ बी कर दें...’ गीत हर किसी जुबां पर चढ़ चुका है। ‘वादा कर ले साजन मेरे, साथ निभावण का...’ दिल को छू लेने वाला है। आईटम गीत ‘चण्डीगढ़ मं बागड़ो...’ बेहद प्रभावी रहा है। अन्य गीत भी दर्शकों को खूब पसन्द आ रहे हैं।
फिल्म की कहानी कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के व लड़की की बेहद साधारण सी प्रेम कहानी है। एक होनहार युवा अभिमन्यु (अंकित सिंह) गाँव के बड़े जमींदार व नम्बरदार चौधरी जोगेन्द्र सिंह (भाल सिंह बल्हारा) का इकलौता बेटा है। वह पढ़ाई के साथ-साथ खेतीबाड़ी का काम भी देखता है। खेत के पास से गुजर रही पुलिस कमिश्नर शमशेर सिंह (गिरिजा शंकर) की लाडली बेटी मीनल (नीतू सिंह) की गाड़ी खराब हो जाती है। मीनल के अनुरोध पर अभिमन्यु गाड़ी स्टार्ट करने में उसकी मदद करता है। संयोगवश दोनों एक ही कॉलेज में दाखिला लेते हैं। यहां पर रैगिंग के मसले पर छात्र नेता विक्की (मनोज राठी) से अभिमन्यु की टक्कर होती है और यह दुश्मनी में बदल जाती है। विक्की गैर-कानूनी काम करने वाले ठेकेदार लक्खी (शिव कुमार) का लड़का है और गैर-कानूनी धंधों में बराबर हाथ बंटाता है।
कॉलेज के छात्रों का टूर हिमाचल जाता है। इस दौरान अभिमन्यु और मीनल दोनों की दोस्ती गहरे में प्यार बदल जाती है। जब इसका पता दोनों के परिवारों को लगता है तो उन्हें बेहद खुशी होती है। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिमन्यु पुलिस में एसीपी बन जाता है। इसी बीच विक्की और उसका पिता लक्खी अभिमन्यु व मीनल का एमएमएस तैयार करके मीनल के पिता कमिशनर शमशेर सिंह को ब्लैकमेल करते हैं। इसके साथ ही एक सुनियोजित साजिश के तहत विक्की मीनल व अभिमन्यु के प्यार में भयंकर दरार पैदा कर देता है। यह प्रेम कहानी आगे क्या मोड़ लेती है और कैसे सुखांत तक पहुंचती है, यह फिल्म का एक सहज एवं महत्वपूर्ण पहलू है।
फिल्म का एक ही नकारात्मक पक्ष नजर आता है। खलनायक के साथ कुछ अश्लील दृश्य होने के कारण यह फिल्म संयुक्त परिवार के साथ बैठकर देखने में जरा हिचक महसूस होती है। सोमनाथ के मन्दिर वाले कथित विवादित कॉमेडी कोई गंभीर मुद्दा नहीं है। यह बिना किसी दुराग्रह के अनायास और सहज व्यंग्य की अभिव्यक्ति है। 
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक हैं।)




सम्पर्क सूत्र:
राजेश कश्यप
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक
म.नं. 1229, पाना नं. 8, नजदीक शिव मन्दिर,
गाँव टिटौली, जिला. रोहतक
हरियाणा-124005
मोबाईल. नं. 09416629889
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