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मंगलवार, 16 मार्च 2010

हमारे देश के समक्ष सुलगते सवाल


हमारे देश के समक्ष सुलगते सवाल
हम पूरे गर्व के साथ अपने गणतन्त्र के ६० दशक पार कर चुके हैं। इसलिए अपने राष्ट्र की स्वतंत्रता, एकता, अखण्डता एवं उसकी अस्मिता से जुडे  कुछ अति संवेदनशील पहलूओं एवं सुलगते सवालों  पर दो टूक चिंतन करना समय की प्रबल मांग है।
देश में आतंकवाद की घटनाएं बड़ी चिंता का विषय हैं। पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आंतकवाद पर भी अंकुश नहीं लग पा रहा है। हाल ही में मुम्बई में हुए आतंकवादी हमलों ने न केवल भारत को आतंकवादी के प्रति अत्यन्त गंभीरता से सोचने को विवश किया है, बल्कि पूरे विश्व  को आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का संकेत दिया है। ल’कर-ए-तोएबा जैसे आतंकवादी संगठन की बढ़ती गतिविधियां भी राष्ट्र के लिए सबसे बड़ी चिन्ता एवं चुनौती का विषय बनती जा रही हैं। दिल्ली, जोधपुर, जयपुर, मालेगाँव आदि आतंकवादी हमलों के बाद भी आतंकवाद के प्रति सरकार का रवैया ढूलमूल रहा, जिसका खामियाजा पूरे देश ने मुम्बई आतंकवादी हमले के रूप में भुगतना पड़ा। यदि अभी भी आतंकवाद से निपटने के लिए ‘पोटा’ जैसे सख्त कानून लागू नहीं किया गया और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर अंकुश नहीं लगाया गया तो हमारे राष्ट्र की राष्ट्रीय एकता,अखण्डता एवं उसकी अस्मिता निश्चित  तौरपर खतरे में पड़ सकती है।
दिनोंदिन देशभक्त शहीदों की कुर्बानियों को भुलाया जा रहा है। काफी लोगों का प्रतिदिन शहीदों को नमन करने की बजाय उन पर कीचड़ उछालकर सुर्खियों में बनना मुख्य शौक बन गया है। हाल ही में एक मुख्यमंत्री द्वारा एक शहीद के परिवार को यह कहना कि ‘यदि यह शहीद का परिवार न हुआ होता तो, उन्हें गली का कुत्ता भी नहीं पूछता’ और एक अन्य वरिष्ठ नेता द्वारा शहीद जाबांज करकरे की शहादत पर सवाल उठाना शहीदों का घोर अपमान है और घोर अपराध है। राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ी महान् हस्तियों पर अनावश्यक  व अभद्र टिपणियाँ करके सरेआम देशद्रोह का अपराध किया जा रहा है और किसी का कुछ नहीं बिगड़ रहा है। इतिहास की संकीर्ण राजनीति की जा रही है। राष्ट्र का आधार स्तम्भ संसद में राजनीतिक लोग अनैतिक व अव्यवहारिक प्रदर्शन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। जाति, धर्म, मजहब के नाम पर गन्दी राजनीति करना आजकल के नेताओं का पेशा  बन गया है। कई कई अरबों-खरबों का घोटाला करने के बावजूद कानूनी ’िाकंजे से बहुत दूर रहते हैं। ये सब हालात आम जनता को आखिर कब तक सहन होंगे?
राष्ट्र से जुड़ी धरोहरों के सम्मान में कोताही बरतना बहुत बड़ा अपराध है। ऐसे अपराधों की सूची तैयार की जाए तो प्रतिदिन बहुत बड़ी सूची तैयार हो जाए। पहले जन-जन की जुबान पर ‘वन्देमातरम्’ और ‘जन-गण-मन’ की स्वर लहरियां और ‘जय जवान, जय किसान’, ‘विश्व विजयी तिरंगा प्यारा’, ‘सारे जहां से अच्छा’ जैसे उद्घोष और ‘मेरी जान-हिन्दूस्तान’ जैसे जज्बात सुनने को मिलते थे। आज कभी किसी किताब में छपे मानचित्र से क’मीर गायब मिलता है, कभी उल्टा तिरंगा फहराने की खबरें सुनने को मिलती हैं, कभी राष्ट्रगान के समय नेताओं के बैठे रहने की गुस्ताखी सुनने को मिलती है तो कभी राष्ट्र की अन्य धरोहरों से छेड़खानियों व उनके प्रति लापरवाहियों की दास्तानें सुनने को मिलती हैं। आखिर क्या है, ये सब?
लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तम्भ कार्यपालिका, विधानपालिका और न्यायपालिका असंख्य खामियों की केन्द्र बन गई हैं। ये तीनों स्तम्भ चन्द राजनीतिकों की कठपुतलियां बनकर रह गई हैं। अपराधिक लोग इनके स्वयंभू बन बैठे हैं। लोकतंत्र में सिर्फ सिर गिने जाने लगे हैं, इसी कारण लोकतंत्र के ये स्तम्भ जर्जर होते चले जा रहे हैं। सभी कानून सिर्फ आम आदमी के लिए बन गए हैं। हमारा कानून एक मुर्गी चोर को तो सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है, लेकिन एक बलात्कारी, हत्यारे अथवा देशद्रोही की पैरवी करता नजर आता है।
लोकतंत्र का चौथा महत्वपूर्ण स्तम्भ कहलाने वाले मीडिया में भी दिनोंदिन खामियां हावी होती चली जा रही हैं, जोकि बेहद अफसोस की बात है। पहले पत्रकारिता एक मिशन हुआ करता था, जो सत्य, न्याय और धर्म के लिए कुर्बानी देने से भी नहीं हिचकिचाता था। लेकिन आज की पत्रकारिता व्यवसाय के रूप में तब्दील हो गई है और यह सार्वजनिक हितों के बजाय निजी हितों की अधिक चिन्ता करती प्रतीत होती है। निष्पक्ष, निर्बाध व निर्णायक भूमिका निभाने वाली कलम आज चन्द सिक्कों की खनक पर चलने लगी है। स्वार्थी लोगों द्वारा मीडिया का दुरूपयोग और व्यवसाय में तब्दील होती पत्रकारिता का भविष्य में क्या अंजाम निकलेगा, यह बतलाने की आवश्यकता  नहीं है।
निरन्तर बढ़ता भ्रष्टाचार देश के लिए ‘कैन्सर’ से भी बढ़कर घातक नासूर बन चुका है। कोई भी ऐसा विभाग नहीं बचा है, जिसमें भ्रष्टाचार न हो। कदम कदम पर घूसखोरी, कामचोरी, लापरवाही और शाही दादागिरी नजर आती है। प्रतिवर्ष अरबों-खरबों की योजनाएं बनती हैं और उनका लाभ आम आदमी तक बिल्कुल नहीं पहुंच पाता। सारा पैसा नौकरशाही और दलाल लोगों की जेब में जा रहा है। सरकारी व गैर-सरकारी सामाजिक संस्थाएं भी सरकारी पैसे का खूब दुरूपयोग कर रही हैं। आज भी आम आदमी रोटी, कपड़ा और मकान की अपनी दशकों पुरानी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है और हम ‘विजन-२०२०’ का राग अलाप रहे हैं। गरीब आदमी निरन्तर गरीबी की दल-दल में समाता जा रहा है और अमीर दुगना अमीर होता जा रहा है। अमीरी और गरीबी की तेजी से बढ़ती यह खाई भविष्य में क्या गुल खिलाएगी, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
देश का अन्नदाता किसान कर्ज से दबा पड़ा है और आत्महत्या करने के लिए विवश है। खारे पानी का प्रति’ात लगातार बढ़ रहा है। जल स्तर भी निरन्तर नीचे जा रहा है। जमीन की उपजाऊ  क्षमता धीरे धीरे कम होती जा रही है। किसानों को खाद, बीज व दवाईयों के मामले में कालाबाजारी का सामना अलग से करना पड़ रहा है। बाजार में खुल्ले धड़ल्ले से नकली रासायनिक खाद, बीज व कीटना’ाक किसानों को तबाह कर रहे है। कई शहरों में किसानों की फसल मण्डियों में बिखरी फिरती है, उसे उचित कीमत भी नहीं मिल पाती है। किसानों को खेती से उतना फायदा नहीं मिल पा रहा है, जितना कि उसका खर्च हो रहा है। किसानों की यह दुर्दशा आखिर किससे छुपी है?
देश का नौजवान बेकारी व बेरोजगारी के चंगुल में फंसकर अपराधिक मार्ग का अनुसरण करने के लिए विवश है। पैसे व ऊँची  पहुँच  रखने वाले लोग ही सरकारी व गैर-सरकारी नौकरियों पर काबिज हो रहे हैं। पैसे, सिफारिश, गरीबी, और भाई-भतीजावाद के चलते देश की असंख्य प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। निरन्तर महंगी होती उच्च शिक्षा  गरीब परिवार के बच्चों से दूर होती चली जा रही है। आज की शिक्षा  पढ़े लिखे बेरोजगार व बेकार तथा अपराधी तैयार करने के सिवाय कुछ नहीं कर पा रही है। क्या शिक्षा   में आचूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता  नहीं है?
आधुनिकता की आड़ में देश का युवावर्ग भारतीय संस्कृति व सभ्यता को भुलाकर पश्चमी  संस्कृति की कठपुतली बनता जा रहा है। इसके पीछे मीडिया की अह्म भूमिका है। घर-घर में टी.वी. व रेडियो के माध्यम से अश्लीलता का समावेश हो रहा है। विदेशी चैनल निर्बाध रूप से नंगापन व भौंडापन परोस रहे हैं। युवावर्ग को भटकाने में बालीवुड भी पीछे नहीं हैं। प्रतिवर्ष ऐसी सैंकड़ों फिल्में प्रदर्शित  होती हैं, जिनमें अंग प्रदर्शन, अश्लीलता  व सैक्स की भावनाओं को भड़काने के सिवाय और कोई मसाला नहीं होता। कई समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएं तो केवल उत्तेजक सामग्री परोसकर ही अपने व्यवसाय को दिनोंदिन फैला रहे हैं। नंगी व भद्दी सैक्सी किताबें व ब्लू फिल्में युवावर्ग की मूल जड़ को खोखला कर रही हैं।
नैतिकता, त्याग, ईमानदारी, परोपकारिता, कर्मठता व वफादारी जैसे गुण देखने दुलर्भ होते चले जा रहे हैं। छल-फरेब, आपसी ईष्र्या-द्वेष, संकीर्ण प्रतिस्पद्र्धा, कट्टरता, बेईमानी जैसे दुर्गण कुकरमुत्तों की तरह उग आए हैं। जाति-पाति, धर्म, मजहब, वर्ग विशेष  पर आज भी दंगे हो जाते हैं। मानसिक संकीर्णता हमारा पीछा ही नहीं छोड़ पा रही है।
दहेजप्रथा, कन्या-भ्रूण हत्या, नारी-प्रताड़ना, हत्या, बलात्कार जैसी सामाजिक कुरीतियां व अपराध समाज को विकृत कर रहे हैं। नशा, जुआखोरी, चोरी, डकैती, अपहरण, लूटखसोट जैसी प्रवृतियां देश की नींव को खोखला कर रही हैं। बढ़ती जनसंख्या, बढ़ता लिंगानुपात, घटते रोजगार, प्रदूषित होता पर्यावरण, पिंघलता हुआ हिमालय, गन्दे नाले बनती पवित्र नदियां आदि सब मिलकर आने वाले कैसे भविष्य की तस्वीर बनाते हैं, यह शायद बतलाने की आवश्कता  नहीं है।
इस तरह की अनेकों समस्याएं हैं जो हमारे देश के समक्ष कड़ी एवं विकट चुनौतियां बनकर खड़ी हैं। अत: जन-जन का मन से इन चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने, इनसे निपटने की कारगर रणनीति बनाना, सार्थक चिन्तन करना और अपनी अपनी सकारात्मक भूमिका सुनिश्चित  करना ही प्रमुख ध्येय होना चाहिए। यदि हमने समय रहते यह सब कदम नहीं उठाए तो कहने की आव’यकता नहीं कि हमारा कैसा भविष्य होगा।

-राजेश कश्यप
स्वतंत्र लेखक, समीक्षक एवं पत्रकार,
गाँव व डाकखाना. टिटौली
जिला व तहसील. रोहतक
हरियाणा-१२४००५
मो. नं. 09416629889





छोरियां नैं बचाओ हत्यारयाँ तै !!

छोरियां नैं बचाओ  हत्यारयाँ तै !!
अर्ज करूं सूं मैं, थाम सारयाँ तैं !
छोरियां नैं बचाओ हत्यारयाँ तै !!
छोरी मारयां  तै, कोय सुख नहीं पावैगा!
वो पापी सीधा नरक-कुण्ड मं जावैगा!!
छोरी तो जग जणनी है!
ये बात सबनै समझणी है!!
घणी बरतणी है होशियारी!
कूख पै ना चलै कोए आरी!!
थारी बड़ी सै या जिम्मेदारी,
नहीं तै हर कोय पछतावैगा!!
छोरी मरवाणा मत समझो खेल!
जै पकड़े गए तै होज्यागी जेल!!
बणज्यागी मुश्किल सारयां  गेल!
छोरी बिन चलै ना बंशबेल!!
बिना होए मेल छोरी-छोरे का,
बताओ कौण सृष्टि रचावैगा!!
छोरी नैं थाम, मत समझो बोझ!
कंधे से कंधा मिलाकै, वा कमावै रोज!!
राखै मौज आगले-पाछले दोनूं घर!
बानी लावै, खूब जी भर-भर!
कर-कर कै छोरी का कत्ल कूख मं,
हर कोय भारया पाप कमावैगा!!
पढ़ लिख कै नैं, रोशन नाम करै थारा!
इंदिरा, कल्पना, किरण बेदी नैं, जाणै जग सारा!!
थारा दिमाग, क्यूँ  इतना चकरार्या सै!
छोरियां का महत्व, क्यूं नहीं समझ आ रहया सै!!
समझा रहया सै जो, राजेश कश्यप टिटौली आला,
उतना खोल कै, बता कौन समझावैगा!!
छोरी मारयां तै, कोय सुख नहीं पावैगा!
वो पापी सीधा नरक-कुण्ड मं जावैगा!!
अर्ज करूं सूं मैं, थाम सारयाँ तैं !
छोरियां नैं बचाओ हत्यारयाँ  तै !!
(-राजेश कश्यप)
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक
टिटौली (रोहतक), हरियाणा-१२४००५
मोबाईल : 09416629889
e-mail : rkk100@rediffmail.com

मंगलवार, 9 मार्च 2010

आजादी का अर्थ/राजेश कश्यप

आजादी का अर्थ
हम आजाद हैं!
हर तरह से आजाद!!
पैरों में चप्पल-जूतों का भी बन्धन नहीं!
सिर ढ़कने वाले घर-छप्पर-भवन नहीं!!
शिक्षा के सूत्रों से एकदम मुक्त!
सरकारी कागजों से बिल्कुल लुप्त!!
सपनों का भी बोझ नहीं!
कोई ठौर-ठिकाना खोज नहीं!!
व्यंजन और मनोंरंजन का है सूनापन!
कपड़ों के भी आधीन नहीं है पूरा बदन!!
सुबह-शाम की भी कोई फिक्र नहीं!
आज यहाँ तो कल कहीं!!
दु:ख-सुख से हैं कोसों दूर!
मानस-पत्थर जो ठहरे हुजूर!!
हमारी किसी को नहीं कोई परवाह!
अजीब है आजादी, वाह भई वाह!!
हमें तो बस है एक ही दर्द!
कोई पूछने चला आया हमसे, आजादी का अर्थ!!

-(राजेश कश्यप)
टिटौली (रोहतक) हरियाणा-१२४००५

गुरुवार, 4 मार्च 2010

हरियाणा कश्यप राजपूत सभा, रोहतक की नई कार्यकारिणी के सदस्य


हरियाणा कश्यप राजपूत सभा का प्रथम कार्यकारिणी - परिचय सम्मलेन २० दिसम्बर २००९ को छोटूराम धर्मशाला , रोहतक में जिले के प्रधान राजेश कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। सम्मलेन के मुख्य अतिथि प्रदेशाध्यक्ष देशराज कश्यप थे और विशिष्ट अतिथि सरपरस्त बलजीत सिंह मतौरिया एवं चुनाव कमेटी के चेयरमेन सुंदर सिंह कश्यप थे। सम्मलेन में तालियों की भारी गडगडाहट के बीच प्रधान राजेश कश्यप ने अपने जिले की नयी कार्यकारिणी घोषित की। नयी कार्यकारिणी में जिला स्तर पर जय भगवान कश्यप को सचिव, सत्तेवान कश्यप को खजांची , रोहताश कश्यप को वरिष्ठ उप -प्रधान, प्रदीप कश्यप को सह-सचिव, कृष्ण चन्द्र कश्यप को ऑडिटर, अन्नू कश्यप को प्रेस सचिव, सत्तेवान कश्यप-धर्मेन्द्र कश्यप एवं सूरज कश्यप को प्रचार सचिव के रूप में शामिल किया गया।

सम्मलेन में नव-निर्वाचित कार्यकारिणी के सदस्यों का परिचय करवाया गया और सभी पदाधिकारियों को परिचय-पत्र प्रदान किये गए। सम्मलेन के दौरान सभी पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के ऐतिहासिक रूप से पुनः हरियाणा की बागडोर सँभालने पर अत्यंत ख़ुशी व्यक्त की गई और उन्हें बधाईयाँ दी गयीं । सभी वक्ताओं ने प्रधान राजेश कश्यप के नेत्रित्व की खूब तारीफ की और उन्हें अच्छी कर्मठ कार्यकारिणी गठित करने के लिए बधाईयाँ दी।




मुख्य अतिथि प्रदेशाध्यक्ष देशराज कश्यप ने अपने संबोधन में कहा की कश्या समाज को जागृत, संगठित एवं कर्मठ बनाने का समय आ गया है। उन्होंने आगे कहा की कश्यप समाज के उत्थान के लिए सरकार को गंभीर एवं ठोस कदम उठाते हुए उन्हें राजनीतिक भागीदारी देनी होगी। मुख्य अतिथि ने आगे कहा की कश्यप समाज के हकों को हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।




विशिष्ट अतिथि सरपरस्त बलजीत सिंह मतौरिया ने कहा की वर्तमान कांग्रेस सरकार से कश्यप समाज को बहुत उम्मीदें हैं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा की मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को निकट भविष्य में समस्त कश्यप समाज की तरफ से सम्मानित किया जायेगा।




दुसरे विशिष्ट अतिथि सुंदर सिंह कश्यप ने अपने संबोधन में कहा की कश्यप समाज को अपने हकों के लिए आरपार की लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने आगामी ३ जनवरी को कश्यप राजपूत धर्मशाला , कुरुक्षेत्र में होने वाले हरियाणा कश्यप राजपूत सभा के नए प्रदेशाध्यक्ष के चुनावों में सभी पदाधिकारियों को आमंत्रित किया और उनसे अपनी सूझ-बुझ से अच्छे प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव करने के लिए अपील की।




सम्मलेन के अध्यक्ष एवं रोहतक जिले के प्रधान राजेश कश्यप ने अपने संबोधन में कहा की कश्यप समाज के संघर्ष को बड़ी तेजी से आगे बढाया जायेगा। उन्होंने आगे कहा की अगली कड़ी में प्रत्येक गाँव में कश्यप समाज का एक प्रधान नियुक्त किया जायेगा और कश्यप समाज के हर घर तक जाकर उनके सुख-दुःख का पता लगाया जायेगा। श्री कश्यप ने आगे कहा की कश्यप समाज अपनी जायज मांगों को मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के सामने रखेगा।




सम्मलेन में कार्यकरिणी के सभी सदस्यों ने कश्यप समाज को आगे बढ़ने एवं तन-मन-धन से समाज के प्रति समर्पित रहने की शपथ ली। सम्मलेन को पानीपत इकाई के प्रधान लखमी चंद कश्यप , सोनीपत इकाई के प्रधान जय भगवान कश्यप, अजमेर कश्यप आदि कई वक्ताओं ने भी संबोधित किया।
सृष्टि के सृजक महर्षि कश्यप


मुनिराज महर्षि कश्यप के मानस-पुत्र और मरीची ऋषि के महातेजस्वी पुत्र थे। इन्हें अनिष्टनेमी के नाम से भी जाना जाता है। महर्षि कश्यप की माता का नाम कला था, जो कि कर्दम ऋषि की पुत्री और कपिल देव की बहन थी। महर्षि कश्यप ऋषि-मुनियों में श्रेष्ठ माने जाते हैं। सुर-असुरों के मूल पुरुष मुनिराज कश्यप का आश्रम मेरू पर्वत के शिखर पर था, जहाँ वे परब्रह्म परमात्मा के ध्यान में मग्न रहते थे। पौराणिक संदर्भों के अनुसार सृष्टि की रचना करने के लिए ब्रह्माण्ड में सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा जी के दायें अंगूठे से दक्ष प्रजापति हुए। ब्रह्मा जी के अनुनय-विनय पर दक्ष प्रजापति ने अपनी पत्नी असिक्नी के गर्भ से 66 कन्याएँ पैदा कीं। इन कन्याओं में से 13 कन्याएँ महर्षि कश्यप की पत्नियां बनीं। मुख्यत इन्हीं कन्याओं से सृष्टि का सृजन हुआ और महर्षि कश्यप सृष्टि के सृजक बने। महर्षि कश्यप सप्तऋषियों में प्रमुख माने गये हैं। सप्तऋषियों की पुष्टि श्री विष्णु पुराण में इस प्रकार होती है -वसिष्ठ काश्यपो यात्रिर्जमदग्निस्सगौत। विश्वामित्रभरद्वाजौ सप्त सप्तर्षयोभवन्।। (अर्थात् सातवें मन्वन्तर में सप्तऋषि इस प्रकार हैं - वसिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज)। श्रीमद्भागवत के छठे अध्याय के अनुसार दक्ष प्रजापति ने अपनी साठ कन्याओं में से दस कन्याओं का विवाह धर्म के साथ, तेरह कन्याओं का विवाह महर्षि कश्यप के साथ, सत्ताईस कन्याओं का विवाह चंद्रमा के साथ, दो कन्याओं का विवाह भूत के साथ, दो कन्याओं का विवाह अंगीरा के साथ, दो कन्याओं का विवाह कृशाश्व के साथ और शेष चार कन्याओं का विवाह भी कश्यप के साथ ही किया। इस प्रकार महर्षि कश्यप की अदिति, दिति, दनु, काष्ठा, अरिष्टा, सुरसा, इला, मुनि, क्रोधवशा, ताम्रा, सुरभि, सुरसा, तिमि, विनता, कद्रू, पतांगी और यामिनी आदि पत्नियां बनीं। महर्षि कश्यप ने अपनी पत्नी अदिति के गर्भ से बारह आदित्य पैदा किये, जिनमें सर्वव्यापक देवाधिदेव नारायण का वामन अवतार भी शामिल था। पौराणिक संदर्भों के अनुसार चाक्षुष मन्वन्तर में तुषित नामक बारह श्रेष्ठगणों ने बारह आदित्यों के रूप में महर्षि कश्यप की पत्नी अदिति के गर्भ से जन्म लिया, जो कि इस प्रकार थे - विवस्वान्, अर्यमा, पूषा, त्वष्टा, सविता, भग, धाता, विधाता, वरुण, मित्र, इंद्र और त्रिविक्रम (भगवान वामन)। महर्षि कश्यप के पुत्र विस्वान से मनु का जन्म हुआ। महाराज मनु को इक्ष्वाकु, नृग, धृष्ट, शर्याति, नरिष्यन्त, प्रान्शु, नाभाग, दिष्ट, करूष और पृषध्र नामक दस श्रेष्ठ पुत्रों की प्राप्ति हुई। महर्षि कश्यप ने दिति के गर्भ से परम् दुर्जय हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष नामक दो पुत्र एवं सिंहिका नामक एक पुत्री पैदा की। श्रीमद्भागवत् के अनुसार इन तीन संतानों के अलावा दिति के गर्भ से कश्यप के 49 अन्य पुत्रों का जन्म भी हुआ, जो कि मरून्दण कहलाए। कश्यप के ये पुत्र निसंतान रहे। देवराज इन्द्र ने इन्हें अपने समान ही देवता बना लिया। जबकि हिरण्यकश्यप को चार पुत्रों अनुहल्लाद, हल्लाद, परम भक्त प्रह्लाद, संहल्लाद आदि की प्राप्ति हुई। महर्षि कश्यप को उनकी पत्नी दनु के गर्भ से द्विमुर्धा, शम्बर, अरिष्ट, हयग्रीव, विभावसु, अरूण, अनुतापन, धूम्रकेश, विरूपाक्ष, दुर्जय, अयोमुख, शंकुशिरा, कपिल, शंकर, एकचक्र, महाबाहु, तारक, महाबल, स्वर्भानु, वृषपर्वा, महाबली पुलोम और विप्रचिति आदि 61 महान् पुत्रों की प्राप्ति हुई। रानी काष्ठा से घोड़े आदि एक खुर वाले पशु उत्पन्न हुए। पत्नी अरिष्टा से गंधर्व पैदा हुए। सुरसा नामक रानी की कोख से यातुधान (राक्षस) उत्पन्न हुए। इला से वृक्ष, लता आदि पृथ्वी पर उत्पन्न होने वाली वनस्पतियों का जन्म हुआ। मुनि के गर्भ से अप्सराएँ जन्मीं। कश्यप की क्रोधवशा नामक रानी ने सांप, बिच्छु आदि विषैले जन्तु पैदा किये। ताम्रा ने बाज, गिद्ध आदि शिकारी पक्षियों को अपनी संतान के रूप में जन्म दिया। सुरभि ने भैंस, गाय तथा दो खुर वाले पशुओं की उत्पत्ति की। रानी सरसा ने बाघ आदि हिंसक जीवों को पैदा किया। तिमि ने जलचर जन्तुओं को अपनी संतान के रूप में उत्पन्न किया। महर्षि कश्यप ने रानी विनता के गर्भ से गरुड़ (भगवान विष्णु का वाहन) और वरुण (सूर्य का सारथि) पैदा किये। कद्रू की कोख से अनेक नागों का जन्म हुआ। रानी पतंगी से पक्षियों का जन्म हुआ। यामिनी के गर्भ से शलभों (पतंगों) का जन्म हुआ। ब्रह्मा जी की आज्ञा से प्रजापति कश्यप ने वैश्वानर की दो पुत्रियों पुलोमा और कालका के साथ भी विवाह किया। उनसे पौलोम और कालकेय नाम के साठ हजार रणवीर दानवों का जन्म हुआ जो कि कालान्तर में निवातकवच के नाम से विख्यात हुए। मुनिराज कश्यप नीतिप्रिय थे और वे स्वयं भी धर्म-नीति के अनुसार चलते थे और दूसरों को भी इसी नीति का पालन करने का उपदेश देते थे। उन्होंने अधर्म का पक्ष कभी नहीं लिया, चाहे इसमें उनके पुत्र ही क्यों न शामिल हों। महर्षि कश्यप राग-द्वेष रहित, परोपकारी, चरित्रवान और प्रजापालक थे। वे निर्भीक एवं निर्लोभी थे। कश्यप मुनि निरंतर धर्मोपदेश करते थे, जिसके कारण उन्हें श्रेष्ठतम उपाधि हासिल हुई। समस्त देव, दानव एवं मानव उनकी आज्ञा का अक्षरश पालन करते थे। महर्षि कश्यप ने `स्मृति-ग्रंथ' जैसे महान् ग्रंथ की रचना की। उन्हीं की कृपा से राजा नरवाहनदत्त चक्रवर्ती राजा की श्रेष्ठ पदवी प्राप्त कर सका।

शनिवार, 23 जनवरी 2010

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सोमवार, 10 अगस्त 2009

समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं व टेलिविज़न की वेबसाइट्स / राजेश कश्यप

समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं व टेलिविज़न की वेबसाइट्स / राजेश कश्यप
list of websites of almost all the Indian Newspapers and TV channels.
5abi
Aajkaal Bengali, Kolkata
Aaj Tak
ABC Live
Anandabazar Bengali, West bengal
Aaraamthinai
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Accommodation Times Agra of Taj Agra
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Amar Ujala
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The Daily Milap
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Dainik Aikya Satara
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