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मंगलवार, 2 अगस्त 2016

हरियाणा में कब रूकेगा दलित महिला उत्पीड़न?

यक्ष प्रश्न /
हरियाणा में कब रूकेगा दलित महिला उत्पीड़न?
-राजेश कश्यप

दलित महिलाओं पर अत्याचार और बलात्कार की रूह कंपा देने वाली घटनाओं के कारण हरियाणा एक बार फिर देश-दुनिया में शर्मसार है, जोकि बेहद चिंता एवं विडम्बना का विषय है। तीन साल पहले सामूहिक बलात्कार की शिकार भिवानी की एक छात्रा को 50 लाख रूपये में समझौता न करने पर फिर से आरोपियों द्वारा रोहतक में सामूहिक दुष्कर्म करने की हृदय विदारक घटना ने हर किसी को दहलाकर रख दिया है और महिला सुरक्षा व कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार तीन साल पहले भिवानी में पाँच दरिन्दों ने छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार किया था। तब से बलात्कारी उनसे 50 लाख रूपये लेकर समझौता करने और मुकदमा वापिस लेने का कई बार दबाव बना चुके थे। लेकिन, जब वे डराने व दबाव बनाने के हर प्रयास में नाकाम रहे तो उन्होंने छात्रा को पहले जैसा हाल करने की धमकी तक दे डाली। इस बीच छात्रा ने रोहतक के एक काॅलेज में एमकाॅम में दाखिला ले लिया और किराए के कमरे मंे रहने लगी। गत 13 जुलाई, 2016 को कार में आए पाँचों आरोपियों ने छात्रा का काॅलेज के बाहर से अपहरण करके शहर से बाहर ले जाकर फिर से सामूहिक दुष्कर्म का घिनौना कृत्य किया। उसके बाद उसे झाड़ियों में फेंककर भाग गए। बाद मंे लोगों ने उन्हें फटे कपड़ों में बेहद नाजुक व बेसुध स्थिति में देखा तो उसे पीजीआई पहुंचाया गया। मामला संज्ञान में आने के बावजूद पुलिस प्रशासन ने गम्भीरता नहीं दिखाई और लीपापोती की पूरी कोशिश हुई। एक सप्ताह बाद जब सामाजिक संगठनों ने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज करवाया और राजनीतिकों द्वारा दलित उत्पीड़न के मामले में प्रदेश सरकार को घेरा गया तो प्रशासन, पुलिस और सरकार हरकत में आई और तमाम वे सब कार्यवाहियां शुरू कीं, जोकि मामला संज्ञान मंे आते ही शुरू हो जानी चाहिए थीं। इस मामले की गूंज देश की संसद से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक पहुंची है और देश व प्रदेश को भारी शर्मिन्दगी उठानी पड़ी है।
यह घटना कोई अपवाद भर नहीं है, बल्कि प्रदेश में दलित महिलाओं के साथ हो रहे घोर अत्याचारों की एक नई कड़ी भर है। इससे पहले घटी घटनाओं की एक लंबी फेहरिस्त है। गत, 3 जून, 2016 को घरों में साफ-सफाई करके गुजारा करने वाली रोहतक की बाबरा मोहल्ले की दलित महिला नीतू संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई और उसकी लाश 12 जून को बुरी हालत में सैक्टर तीन-चार के बीच खाली प्लाट में बरामद हुई। पोस्टमार्टम के दौरान पता चला कि इस जघन्य हत्याकाण्ड की शिकार दलित महिला के प्राईवेट पार्ट को कुत्तों ने नोंच खाया था, जिससे महिला के साथ बलात्कार की पुष्टि नहीं हो पाई। इस घटना के विरोध में दर्जनों सामाजिक संगठनों द्वारा सड़कों पर उतरकर धरने-प्रदर्शन जारी हैं, लेकिन पुलिस आज तक दलित महिला की हत्या का सुराग लगाने में कामयाब नहीं हो पाई है। एक अन्य रौंगटे खड़ा कर देने वाली घटना के तहत रोहतक जिले के कलानौर में स्कूल से लौट रही पहली वर्ष की नन्हीं मासूम बच्ची को खेरड़ी निवासी नौंवी कक्षा में पढ़ने वाले दरिन्दे छात्र ने अपनी हैवानियत का शिकार बना डाला। बेहद नाजुक हालत में नन्हीं बच्ची पीजीआई रोहतक में इस कद्र सदमें में है कि माँ के अलावा किसी भी व्यक्ति की परछाई पड़ती है तो बुरी तरह चीख उठती है। डाॅक्टर भी बच्ची की इस हालत को देखकर बेहद दुःखी एवं व्यथित हैं।
वर्ष 2014 में हिसार जिले के गाँव भगाना की चार दलित लड़कियों के साथ हुए गैंगरेप का मामला भी राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था। 25 मार्च, 2014 को रात आठ बजे दबंग जाति के लोगों ने चार दलित परिवार की लड़कियों को घसीटकर कार में डाल लिया और दो दिन तक दर्जन भर युवक गैंगरेप करते रहे। प्राप्त जानकारी के अनुसार ये पीड़िताएं उन दलित परिवारों की थीं, जिनका गाँव के दबंग लोगों ने वर्ष 2011 से जमीन विवाद के चलते सामाजिक बहिष्कार कर रखा था और न्यायालय, मानवाधिकार आयोग एवं अनसूचित जाति आयोग के निर्देशों के बावजूद इस बहिष्कार तक समाप्त नहीं किया गया था। पीड़ित परिवार ने बहिष्कार के बावजूद गाँव नहीं छोड़ा तो गुस्से से भन्नाये दबंगों ने दलित परिवारों को सबक सिखाने के लिए उनकी चार बेटियों के साथ गैंगरेप के कुकत्र्य को अंजाम दे डाला।
25 अगस्त, 2013 को जीन्द जिले के गाँव बनियाखेड़ा की 19 वर्षीया डीएड दलित छात्रा का दुष्कर्म के बाद हत्या करके नहर के समीप झाडियों में फेंका गया शव मिला। जब पीड़ित पक्ष पुलिस की लापरवाही के खिलाफ सडकों पर उतरा तो उन पर बड़ी बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया। अपै्रल, 2013 में भिवानी जिले के रिवासा गाँव में नन्ही बच्ची को दूध पीला रही दलित महिला के साथ दबंगों के सामूहिक बलात्कार करने की शर्मनाक घटना घटी। फरवरी, 2013 में हिसार जिले के सिरसाना गाँव में 13 साल की मासूम बच्ची के साथ कई दबंगों द्वारा सामूहिक बलात्कार जैसा घिनौना कुकत्र्य करने का मामला प्रकाश में आया। फरवरी, 2013 में भिवानी जिले के रत्तेरा गाँव में दबंगों ने एक दलित युवक की घुड़चढ़ी नहीं 3 नवम्बर, 2012 को हिसार के डाया (मंगाली) गाँव में एक दलित लडकी के साथ गैंगरेप किया गया और मामले में बलात्कार की दफा 376 तक हटा दी गई। अक्तूबर, 2012 में जीन्द जिले के सच्चाखेड़ा गाँव में पाँच दबंगों ने एक दलित लडकी के साथ सामूहिक बलात्कार किया। बाद में सभी दोषियों को सजा न मिलने से आहत होकर पीड़िता ने आत्महत्या कर ली। सितम्बर, 2012 में हिसार जिले के डाबड़ा गाँव में दबंगों ने एक दलित लडकी को गैंगरेप का शिकार बनाया। घटना से आहत पीड़िता के पिता ने आत्महत्या कर ली।
ये सब घटनाएं तो सिर्फ बानगी भर हैं। यदि सभी मामलों की सूची तैयार की जाए तो एक लंबी फेहरिस्त तैयार हो जायेगी। सभी मामलों का यदि बारीकी से अवलोकन किया जाए तो हर किसी की रूह कांप उठती है। बेहद विडम्बना का विषय है कि हरियाणा जैसे पावन एवं प्रगतिशील प्रदेश में इस तरह की अनेक घटनाएं निरन्तर घट रही हैं और पुलिस प्रणाली एवं कानून व्यवस्था पर निरन्तर गहरे सवालिया निशान लगा रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक वर्ष जून, 2015 से जून, 2016 के बीच 520 दुष्कर्म की घटनाएं घटी हैं और औसतन हर महीने 43 महिलाओं की इज्जत लुटी गई। इसके साथ ही छेड़खानी के 863 मामले और 801 महिलाओं के अपहरण के मामले दर्ज हुए हैं। प्रदेश में वर्ष 2009 में दलित महिलाओं के विरूद्ध अत्याचारों की 1346 शिकायतें दर्ज हुईं, जोकि वर्ष 2014 में बढ़कर 2233 हो गईं। इन आंकड़ों की गम्भीरता को सहज समझा जा सकता है।
        हरियाणा में अक्तूबर, 2012 में चले बलात्कार के अनवरत सिलसिले से खफा होकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष पी.एल. पूनिया ने हरियाणा को ‘बलात्कार प्रदेश की संज्ञा देने को विवश होना पड़ा था। बेहद विडम्बना का विषय है कि यह स्थिति जस की तस है। गौर करने लायक बात तो यह है कि दलितों पर जब भी कोई अत्याचार होता है तो उस घटना को दबाने की भरसक कोशिश की जाती है। जिन मामलों पर सियासत गर्म होती है, उन्हीं मामलों में पीड़ित दलितों की सुध ली जाती है। शेष मामलों में पीड़ित दलित अन्याय एवं अव्यवस्था के आगे घुटने टेकने को विवश हो जाते हैं। यह परिपाटी बेहद चिंताजनक एवं विडम्बनापूर्ण है। जब तक यह परिपाटी नहीं बदलती है, तब तक दलितों की स्थिति में सुधार आना असंभव लगता है।


(राजेश कश्यप)
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक।

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राजेश कश्यप
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