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मंगलवार, 3 मार्च 2015

सिर्फ 4 मिनट में हरियाणा प्रदेश की परंपरागत हस्तकलाओं के दर्शन!

         सिर्फ 4 मिनट में हरियाणा प्रदेश की परंपरागत हस्तकलाओं के दर्शन! जी हाँ, यदि आप हरियाणा की परंपरागत हस्तकलाओं से रूबरू होना चाहते हैं तो सिर्फ 4 मिनट का समय निकालिए और यह विडियो देखिए। इन हस्तकलाओं को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक (हरियाणा) से संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र एवं छात्राओं ने ‘फाल्गुन उत्सव’ के दौरान तैयार किया। ये हस्तकलाएं हरियाणा की सदियों पुरानी पहचान हैं। जब मशीनी युग नहीं था, तब इन्हें हमारी दादी, नानी, माँ, ताई, चाची आदि अपने हाथों से गढ़ती थीं। यह कटू सत्य है कि आज इक्कीशवीं सदी के इंटरनेट एवं मशीनी युग में प्रदेश की इन परंपरागत हस्तकलाओं की चमक थोड़ी फीकी जरूर हुई है, लेकिन, इन्होंने अपनी अहमियत बिल्कुल नहीं खोई है। कहना न होगा कि इन परपंरागत हस्तकलाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन की सख्त आवश्यकता है। यह बेहद सुखद पहलू है कि इन परपंरागत हस्तकलाओं को इक्कीसवीं सदी की नई पीढ़ी ने गढ़ा है। निःसन्देह, नई पीढ़ी में प्रदेश की इस अमूल्य धरोहर को अंकुरित करने के अनूठे प्रयास के लिए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक साधुवाद का पात्र है। यदि इस तरह के आयोजन अन्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर खुले मंच के माध्यम से भी आयोजित जाएं तो निश्चय ही हरियाणवी कला एवं संस्कृति को नया आयाम मिल सकता है। खैर! आईए, 4 मिनट का समय लगाते हैं और हरियाणा प्रदेश की कुछ परंपरागत हस्तकलाओं से रूबरू होते हैं। यह प्रयास आपको कैसा लगा, जरूर बताईयेगा। आपकी अमूल्य टिप्पणियों का इंतजार रहेगा। (राजेश कश्यप)



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