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शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

ये है अलौकिक ज्ञान गंगा !

ये है अलौकिक ज्ञान गंगा !
-राजेश कश्यप
             भक्ति-भजन की अपार महत्ता है। भक्ति-भजनों में मानव जीवन का सच्चा सार समाहित होता है। एक-एक भजन में अथाह ज्ञान का भण्डार पड़ा है। इन भजनों के सुनने मात्र से ही आत्मिक शांति का अनूठा अहसास होता है। यदि इन भजनों को नित्य एक बार तनिक गुनगुना लिया जाये तो जीवन की सार्थकता का असीम संचार होने लगता है। बड़े-बजुर्गों के पास बैठकर, उनके श्रीमुख से इन भक्ति-भजनों को सुनने का सौभाग्य पाकर देखिये, अनंत अलौकिक आनंद की वर्षा से सराबोर हो उठेंगे। मुझे ऐसा सौभाग्य कई बार मिला है। ऐसे अहसास को आपके साथ सांझा कर रहा हूँ। नीचे 15 भक्ति-भजनों का संग्रह दे रहा हूँ। हर भजन की हर पंक्ति आपके रोम-रोम में समाने वाली है। ये भजन हरियाणा प्रदेश के सोनीपत जिले के गाँव गढ़ी उजाले खां (गोहाना) के बुजुर्ग भक्त सूबे सिंह के श्रीकंठ से निकले हैं। मुझे संयोगवश इन्हें रिकार्ड़ करने व संरक्षित रखने का सुअवसर मिला। ज्ञान का यह अनमोल खजाना आपके सुपुर्द कर रहा हूँ। इन्हें सुनने के बाद, अपनी प्रतिक्रिया से जरूर अवगत करवाना। यदि भजन अच्छे लगें तो आप भी अन्य मित्रों तक पहुंचाना। अब इन भक्ति-भजनों पर बारी-बारी से क्लिक कीजिये और अलौकिक ज्ञान गंगा में डूबकी लगाईये....!!!


1. बाहण मेरी भज ले न करतार, थारा हो ज्यागा उद्धार...!

2. तेरी लीला अजब महान, कुछ भेद नहीें चलता...!

3. मनैं राम भजन मन भावै ऐ सखी, सत्संग की महिमा न्यारी...!

4. तेरा कोई न बणैगा बन्दे प्यारे, जब मारै काल आकै ललकारे...!

5. मेरा-मेरी करते-करते सारा जन्म गंवाएं क्यूं, मिट्टी में मिलाए क्यूं...!

6. दो घड़ी तूं बैठ कै बन्दे राम-नाम गुण गा..!

7. छोड़ जायेगा बन्दे एक दिन, काल का देश बेगाना...!

8. बुरी आदतें सब छूट जाती हैं, जो चलकै संगत में आता है...!

9. दुःख दूर कर हमारा, संसार के रचैया...!

10. चालो देण बधाई हे, हे नेकी घर जन्मा लाल सै...!

11. वेद सन्तों ने सारा बताये दिया, जो समझ में न आए तो मैं क्या करूं..!

12. जन्म ना कर बदनाम, बुरे काम से मन को हटा ले...!

13. सदा नाम ध्याणा रे प्यारे...!

14. ओ भाई, तेरे अन्दर खजाने भरे, क्यूं ना उसकी तलाश करे...!

15. नहीं मालूम है एक दिन, मेरी अर्थी रवां होगी...!

प्रस्तुति : राजेश कश्यप, रोहतक (हरियाणा)