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शुक्रवार, 1 मई 2015

हरियाणा के किसानों की दर्दनाक दास्ताँ : भाग-3

हरियाणा के किसानों की दर्दनाक दास्ताँ : भाग-2  : B
हरियाणा के किसानों की दर्दनाक दास्ताँ : भाग-3 
गिरदावरी में दर्ज फसलों के नुकासान का विवरण
क्र.  जिले का नाम  बर्बाद फसल (एकड़)
1. अंबाला 2,155
2. पंचकूला 58
3. कैथल 61,784
4. कुरूक्षेत्र 21,780
5. यमुनानगर 7,505
6. हिसार 1,31,157
7. सिरसा 23,536
8. पलवल 2,58,554
9. रेवाड़ी 64,697
10. महेन्द्रगढ़ 2,46,078
11. रोहतक 1,06,332
12. पानीपत 8,208
13. सोनीपत 42,628
14. करनाल 13,669
15. झज्जर 36,202
16. फतेहाबाद 2,557
17. जीन्द 67,550
18. भिवानी 1,24,089
19. गुडग़ाँव 56,171
20. फरीदाबाद 36,071
21. मेवात  19,896


मानवाधिकार आयोग किसानों की आत्महत्या पर हुआ गंभीर!
हरियाणा मानवाधिकार आयोग किसानों की आत्महत्याओं को लेकर बेहद गंभीर हो गया है। फसल बर्बाद होने के कारण आत्महत्या कर रहे किसानों के बार में आयोग ने प्रदेश के मुख्य सचिव को चार सप्ताह में जवाब तलब कर लिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस वीरेन्द्र जैन ने जवाब तलब करके पूछा है कि फसल नष्ट होने से किसानों की आत्महत्या या मौतों के मामलों में सरकार क्या पॉलिसी अपना रही है? पीडि़त परिवारों को क्या अंतरिम राहत दी जा रही है?

50 फीसदी अधिक मिलेगा मुआवजा!
       प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऐलान के बाद फसलों की मुआवजा राशि में बढ़ौतरी की घोषणा की गई है। अब 33 फीसदी बर्बाद फसल पर भी मुआवजा देने का निर्णय सरकार ने लिया है। मुआवजा दर में जो 50 फीसदी बढ़ौतरी की घोषणा की है, उसमें गैर-सिंचित खेती पर 4500 रूपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 6800 रूपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जायेगा। सिंचित खेती में मुआवजे की दर 9000 रूपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 13500 रूपये प्रति हेक्टेयर देने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही न्यूनतम मुआवजे के तौर पर 1000 रूपये की राशि दी जायेगी, अर्थात, जिन किसानों की खेती एक हेक्टेयर से कम होगी और उनकीं फसल का नुकसान 33 फीसदी से ज्यादा होगा तो उन्हें कम से कम 1000 रूपये बतौर मुआवजा जरूर दिये जायेंगे। इनके अलावा, बागवानी वाले खेतों में 12000 रूपये प्रति हेक्टेयर की बजाय, 18000 रूपये प्रति हेक्टेयर देने का निर्णय लिया गया है। इस श्रेणी के तहत न्यूनतम मुआवजा राशि 2000 रूपये देना तय किया गये हैं। 
     केन्द्र सरकार की तर्ज पर हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने भी प्रदेश के किसानों को मुआवजा बढ़ाकर देने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत हरियाणा के किसानों को इस प्रकार मुआवजा दिया जायेगा :-
नुकसान का प्रतिशत   गेहूं गेहूँ की फसल पर सरसों की फसल पर
75 से 100 प्रतिशत 12000 रूपये             10000 रूपये
50 से 75 प्रतिशत 9500 रूपये               7000 रूपये
25 से 50 प्रतिशत 7000 रूपये              5500 रूपये 


किसानों को दिया जायेगा 1069 करोड़ रूपये मुआवजा
     हरियाणा सरकार ने गिरदावरी की रिपोर्ट मिलने के बाद घोषण की है कि तय मानदण्डों के अनुसार प्रदेश के किसानों को कुल 1069 करोड़ रूपये बतौर मुआवजा आगामी 15 मई तक युद्धस्तर पर प्रयास करके दिया जायेगा। किसानों को न्यूनतम 250 रूपये की बजाय कम से कम 500 रूपये मुआवजे के रूप में दिये जायेंगे।  मुआवजे का वितरणी सार्वजनिक स्थानों पर किया जायेगा और उसकी पूरी विडियो रिकार्डिंग भी करवाई जायेगी। इस अवसर पर गाँव का सरपंच, नम्बरदार और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किसानों को दिये जाने वाले मुआवजे की निगरानी के लिए स्वयं के साथ-साथ अपने मंत्रियों की जिम्मेदारी भी लगा दी है। 
मंत्री का नाम निगरानी वाले जिले
मनोहर लाल खट्टर अंबाला और हिसार
कैप्टल अभिमन्यु         यमुनानगर और सोनीपत
रामबिलास शर्मा           रोहतक और फरीदाबाद
अनिल विज                  कुरूक्षेत्र और फतेहाबाद
ओपी धनखड़                  पंचकूला और गुडग़ाँव
राव नरबीर सिंह           करनाल और रेवाड़ी
कविता जैन                 जीन्द और भिवानी
बिक्रम सिंह यादव          महेन्द्रगढ़ और झज्जर
कृष्ण बेदी                 कैथल, सिरसा और मेवात

करण देव कंबोज         पानीपत और पलवल  

किसानों को विशेष राहत!
हरियाणा सरकार ने किसानों को विशेष राहत देते हुए निर्णय लिया है कि प्रभावित क्षेत्रों में छह महीने पहले और छह महीने बाद के कृषि बिजली बिलों को माफ किया जायेगा। इसके साथ ही फसली ऋणों की अदायगी तीन वर्षों के लिए पुन: निर्धारित करने और आगामी फसली ऋण जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध करवाने की घोषणा भी की जा चुकी है। 

इस बार नहीं मिलेगा गेहूँ पर कोई बोनस!
हरियाणा कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने हरियाणा सरकार से किसानों को गेहूँ पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के ऊपर 300 रूपये देने की माँग की। लेकिन, इस माँग को ठुकराते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि इस बार कोई बोनस नहीं मिलेगा। बोनस के लिए केन्द्र सरकार के सामने माँग रखी गई थी। लेकिन, सरकार ने बोनस की बजाय मुआवजा राशि बढ़ाकर देने का निर्णय लिया है। 

गेहूँ खरीद में दी गई छूट!
केन्द्र सरकार ने गेहूँ की बर्बाद हुई फसल को देखते हुए खरीद मानकों में भी छूट देने का निर्णय लिया है। अब 50 फीसदी चमक खोने वाले गेहूँ की भी खरीद की जायेगी। 10 फीसदी तक कम चमक वाले गेहूँ पर कोई कटौती नहीं की जायेगी। लेकिन, 11 से 50 फीसदी चमक खोए हुये गेहूँ पर कुछ कटौती जरूर की जायेगी। सूखे और टूटे दानों की वर्तमान तय सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 कर दी गई है। गेहूँ के निर्धारित गीलेपन में कोई छूट नहीं दी गई है और निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप ही 12 प्रतिशत नमी वाले गेहूँ को खरीदा जायेगा। वैल्यू कट से 14 फीसदी तक गीला गेहूँ खरीदने का प्रावधान बना हुआ है।
गिरदावरी की खामियों के चलते खड़ी फसल पर ही चला दिये ट्रैक्टर !
फसल की भारी बर्बादी के बाद सही तरीके से समय पर गिरदावरी न करवाये जाने से खफा होकर किसानों ने प्रदेश के कई स्थानों पर गेहूँ की खड़ी फसल पर ही ट्रैक्टर चला डाले। हांसी के मामनपुरा व माजरा देपल के किसानों ने प्रशासन के समक्ष अपनी 250 एकड़ बर्बाद फसल का रोना रोया और ठीक तरीके से गिरदावरी करवाने की माँग कई दिनों तक की। लेकिन, उनकीं मांगों की तरफ प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया तो क्षुब्ध किसानों ने गेहूँ की खड़ी फसल पर ही ट्रैक्टर चला दिया। उधर, रोहतक लोकसभा क्षेत्र के सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने भी प्रदेश सरकार द्वारा करवाई गई गिरदावरी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह गिरदावरी किसान के हक में नहीं, बल्कि अफसरों के हक में हुई है।
फसल बर्बादी का मात्र 150 रूपये प्रति एकड़ मुआवजा!
पिछले वर्ष सूखे के कारण बर्बाद हुई फसल का मुआवजा जीन्द जिले में मात्र 150 रूपये प्रति एकड़ ही दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जुलाना तहसील में झमौला गाँवों के किसानों को मुआवजा देने के लिये बुलाया गया। जब झमौला गाँव के किसान सुरेश को 5 एकड़ बर्बाद फसल के लिए मात्र 800 रूपये दिये गये तो उन्हें गहरा झटका लगा। इससे तो फसल के बीज की कीमत भी वसूल नहीं हो पाई। अन्य किसानों को भी 150 से 160 रूपये प्रति एकड़ मुआवजा वितरीत किया गया। किसानों की शिकायत पर एसडीएम ने जांच करवाने का आश्वासन दिया है।
अब सूखे का संकट झेलने के लिए तैयार रहें किसान!
हरियाणा प्रदेश के किसान मार्च-अप्रैल की बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि के कहर से उबर भी नहीं पायेंगे और जल्द ही सूखे के संकट में फंस जायेंगे। ऐसी संभावना जताते हुए चण्डीगढ़ के मौसम विभाग ने कहा है कि बीते मानसून की तरह ही इस वर्ष भी हरियाणा प्रदेश में मानसून कमजोर रहेगा और लगभग 50 से 57 प्रतिशत कम बारिश होगी। सामान्य बारिश होने के आसार महज 28 प्रतिशत ही हैं और सामान्य से कम होने की 35 प्रतिशत संभावना है।  

किसानों की आत्महत्या बनाम सियासती बयान!
''किसानों की जिन्दगी से और कोई बड़ी चीज नहीं है और सरकार सबके सुझावों के साथ इस समस्या का निदान चाहती है, जिससे हम अपने किसानों को न मरने दें।"-नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री, लोकसभा में बोलते हुए। 
''किसानों को चिंता करने की आवश्यता नहीं है। ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा किसानों को अधिकतम दिया जायेगा।"-मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री, हरियाणा सरकार।
''बरसात और ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है, जिसके कारण किसान भूखमरी की कगार पर पहुँच चुका है। सरकार 30,000 रूपये प्रति एकड़ मुआवजा दे।"-भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री, हरियाणा। 
''किसानों की मौत का मामला गंभीर है। सरकार किसानों को राहत देने के हित के प्रति गंभीर है तथा किसानों को राहत देने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है।"-कैप्टन अभिमन्यु, वित्तमंत्री, हरियाणा सरकार। 
''किसानों की मौत को हल्के में न लें और न ही इस तरह के 'जटिल मामलोंÓ में हल्का स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिये।"-रघु राम राजन, गर्वनर, भारतीय रिजर्व बैंक।
''कृषि मंत्री में अब भी थोड़ी शर्म बची है तो अपने पद से इस्तीफा दे दें। ऐसे संवेदनहीन व्यक्ति को कृषि मंत्री बने रहने का कोई हक नहीं है।"-दुष्यन्त चौटाला, इनेलो सांसद हिसार लोकसभा क्षेत्र।
''किसानों की मौत के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार है। सरकार किसानों को इस मुसीबत से निकालने के लिए कुछ भी नहीं कर रही है। सरकार को कम से कम 30000 रूपये प्रति एकड़ मुआवजा देना चाहिए।"-दीपेन्द्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस सांसद, लोकसभा क्षेत्र।
''आत्महत्या करना अपराध है। कोई भी आत्महत्या करने वाला व्यक्ति जिम्मेदारी से भागकर अपने नादान बच्चों और अबोध पत्नी पर बोझ डालकर चला जाता है। सरकार जैसी कोई संस्था ऐसे कायर आदमी के साथ खड़ी नहीं हो सकती।"-ओम प्रकाश धनखड़, कृषि मंत्री, हरियाणा सरकार। 
''पहले भी धनखड़ ऊल-जलूल बयान दे चुके हैं। क्या ये सरकार कभी जागेगी या अभी और किसानों की बलि लेगी?"-डॉ. अशोक तंवर, हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष।