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शनिवार, 2 मई 2015

हरियाणा के किसानों की दर्दनाक दास्ताँ : भाग-2 : B

हरियाणा के किसानों की दर्दनाक दास्ताँ : भाग-2  : A
हरियाणा के किसानों की दर्दनाक दास्ताँ : भाग-2  : B

31. जोगेन्द्र (43 वर्ष) नकीपुर ढिग़ावा भिवानी हृदयघात : अढ़ाई एकड़ जमीन पर लहलहाती गेहूँ की फसल से ढ़ेर सारी उम्मीदें पैदा हो चुकी थीं। फसल कटाई के दौरान गेहूँ की बर्बादी को देखकर ऐसा सदमा लगा कि सांसों की डोर ही टूट गई। 
32. जोगेन्द्र (45 वर्ष) पहाड़ी लोहारू भिवानी हृदयघात : बर्बाद फसल को देखकर एकाएक सदमा लगा और हार्टअटैक से मौत हो गई।
33. फूल सिंह चहडक़लां भिवानी हृदयघात : फसल की बर्बादी सहन न कर पाने की वजह से हृदयघात का शिकार हुआ।
34. राजेन्द्र (45 वर्ष) कासनी भिवानी हृदयघात : तीन एकड़ सरसों की फसल लगाई थी। थे्रसिंग से सरसों निकाली तो बहुत कम निकली, जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा और हार्टअटैक का शिकार हो गया। 
35. नरेश (50 वर्ष) रोहट सोनीपत हृदयघात पाँच एकड़ जमीन गेहूँ की अच्छी फसल लगी थी। पंचायत के सचिव की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे। जब बर्बाद हुई फसल को देखने खेत में पहुँचे तो सदमा खा गया और हृदयघात का शिकार हो गया।
36. युद्धवीर (42 वर्ष) रिवाड़ा सोनीपत आत्महत्या : 32000 रूपये प्रति एकड़ की दर पर छह एकड़ ठेके पर और दो एकड़ घर की जमीन पर गेहूँ की फसल उगा रखी थी। सिर पर 5 लाख का कर्ज चढ़ा हुआ था। जैसे ही फसल चौपट हुई तो परेशान होकर जहर निगल लिया। 
37. सुखबीर (63 वर्ष) बुसाना सोनीपत हृदयघात : 17 एकड़ जमीन पर गेहूँ की फसल लगाई हुई थी, जिसमें 15 एकड़ लीज पर ले रखी थी। फसल की बर्बाद सहन नहीं कर पाने के कारण हार्टअटैक से देहांत हो गया। 
38. बलवान (59 वर्ष) कटवाल सोनीपत हृदयघात : 30,000 रूपये प्रति एकड़ के हिसाब से सात एकड़ जमीन ठेके पर लेकर गेहूँ की फसल लगाई थी। अपने भाई के साथ खेतों में बर्बाद हुई फसल को देखने गया तो सदमा खा गया और 'हम तो बर्बाद हो गयेÓ कहते-कहते बेहोश होकर गिर पड़ा। खानपुर पीजीआई में ले जाया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। तीन बेटे और तीन बेटियों की फीस और कर्ज की चिंता ने अन्दर से तोडक़र रख दिया था।
39. अमित (30 वर्ष) गोहाना सोनीपत आत्महत्या : 40 एकड़ जमीन, जिसमें खुद की अढ़ाई एकड़ जमीन को छोडक़र शेष ठेके पर ली हुई थी, पर गेहूँ व सरसों की फसल लगा रखी थी। दस लाख रूपये बैंक का कर्ज और कई लाख रूपये का कर्ज आढ़तियों का हो चुका था। फसल की बर्बादी ने उसे ऐसा पेरशान किया कि कटवाल के नजदीक गुजरने वाली जेएलएन नहर में पुल में कूदकर आत्महत्या कर ली। 
40. हवा सिंह (66 वर्ष) बरौदा सोनीपत हृदयघात : परिवार सहित थै्रसिंग मशीन से गेहूँ निकाल रहे थे। जब दस-बारह पूलियों से मुठ्ठी भर गेहूँ निकलता देखा तो गहरा सदमा लगा। सीने में एकाएक तेज दर्द उठा और मौत के मुँह में चले गए। 
41. राजबीर (55 वर्ष) जुआं सोनीपत हृदयघात : बर्बाद हुई फसल से काफी परेशान थे। जब बेटे के साथ कम्बाईन से गेहूँ निकलवाने खेत में पहुँचे तो बेहद कम पैदावार को देखकर हार्टअटैक आया और मौके पर ही दम तोड़ दिया। 
42. हिटलर (38 वर्ष) बिठमड़ा सोनीपत हृदयघात : उम्मीदों से बेहद कम गेहूँ निकलता देख अचानक सीने में दर्द उठा कि मौके पर ही मौत हो गई।
43. संजय (37 वर्ष) रभड़ा सोनीपत हृदयघात : 15 एकड़ में गेहँू की फसल लगा रखी थी, जिसमें दस एकड़ जमीन पट्टे पर ली गई थी। फसल की बर्बादी देखकर एकाएक सीने में दर्द उठा और हृदयघात हो गया।
44. बलबीर (50 वर्ष) जुआं सोनीपत हृदयघात : मूल रूप से भांबर गाँव का निवासी था। इस समय ससुराल में रह रहा था। खेत में हुई तबाही को देखने को गया तो हार्टअटैक का शिकार हो गया।  
45. अशोक (33 वर्ष) राजलुगढ़ी सोनीपत आत्महत्या : बड़ी उम्मीदों से छह एकड़ जमीन पर गेहूँ की फसल उगाई थी, जिसमें चार एकड जमीन 38000 प्रति एकड़ ठेके पर ली थी। फसल बर्बाद हुई तो घर में फंदा लगाकर जान दे दी। 
46. ओम प्रकाश माजरा झज्जर हृदयघात : बर्बाद फसल ने बेहद परेशान किया हुआ था। थ्रेसिंग के दौरान गेहूँ नाममात्र का निकलता देख एकाएक सदमा खा गया और सीने में दर्द उठ गया। निजी अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 
47. सुरेन्द्र (50 वर्ष) धांधलान झज्जर हृदयघात : चौदह एकड़ में बर्बाद हुई फसल को नहीं देख पाया और बेहोश होकर खेतों में ही गिर पड़ा। जब अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 
48. राजेन्द्र बिरधाना झज्जर ब्रेनहेमरेज : खेत में खड़ी फसल आग की भेंट चढ़ गई। यह सदमा बर्दास्त नहीं हुआ और बे्रनहेमरेज का शिकार हो गया। 
49. ओमप्रकाश (65 वर्ष) धांधलान झज्जर हृदयघात : फसल बर्बादी का समाचार सुनने के बाद बड़ी जिद्द करके पौत्र के साथ मोटरसाईकिल पर बैठकर खेत देखने पहुँचा। खेत में फसल बर्बादी का मंजर ऐसा देखा कि सदमा खा गये और अंतत: सांसों की डोर टूट गई। 
50. सज्जन सिंह (56 वर्ष) बांडाहेड़ी हिसार हृदयघात : गेहूँ की बर्बाद हुई फसल की कटाई के दौरान दिल का दौरा पड़ा। उसे सामान्य अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 
51. ओमप्रकाश (49 वर्ष) बीड़ बाबरान हिसार आत्महत्या : मेहनत मजदूरी करके जीवन-निर्वाह करते थे। एक चौथाई हिस्से पर सात एकड़ जमीन लेकर गेहूँ की फसल लगा रखी थी। प्रशासन ने मकान खाली करने का नोटिस देकर भारी मानसिक परेशानी में डाला हुआ था। इससे पहले कपास की फसल भी तबाह हो चुकी थी। इसके बाद गेहूँ  फसल की बर्बादी ने परेशानियों को और भी कई गुना बढ़ा दिया और पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर लटकने को विवश कर दिया। 
52. राम सिंह (58 वर्ष) बांडाहेड़ी हिसार हृदयघात : दस एकड़ में चने की फसल लगा रखी थी। जब बर्बाद फसल को देखने खेतों में गया तो चक्कर आ गया और वहीं गिर पड़ा। आसपास के लोगों ने उसे संभाला तो उनकीं मौत हो चुकी थी। 
53. रमेश (28 वर्ष) ढ़ाणी मिराण हिसार ब्रैनहेरेज : आठ एकड़ भूमि पर फसल लगाई थी, जिसमें साढ़े चार एकड़ में गेहूँ और शेष जमीन पर सरसों की फसल थी। फसल की भयंकर बर्बादी और दो लाख रूपये के कर्ज ने उसे जहर निगलने को विवश कर दिया। जब अस्पताल ले जाया गया तो चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।  
54. कृष्ण  उगालन हिसार आत्महत्या : चार एकड़ जमीन पर लगाई गई गेहूँ की फसल से मात्र दो क्विंटल गेहूं निकले तो सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया और खेत में फांसी के फन्दे पर लटकर मौत को गले लगा लिया। 
55. जयवीर (49 वर्ष) भाटोल हिसार हृदयघात : 8 एकड़ जमीन, जिसमें 4 एकड़ लीज पर ली गई थी, में गेहूँ की फसल उगाई हुई थी। फसल की तबाही देखकर खेत में ही दम तोड़ दिया। 
56. महावीर कुलेरी हिसार हृदयघात : खेत में गेहूँ निकलवा रहा था। कम पैदावार देखकर हार्टअटैक आ गया। 
57. रामचन्द्र (55 वर्ष) मिठी हिसार आत्महत्या : फसल की बर्बादी ने मानसिक रूप से ऐसा तोड़ा कि अपने मामा के गाँव सिंघरान पहुँचकर फांसी के फंदे पर झूल गया। 
58. रणधीर देपला हिसार आत्महत्या : रात को जहर निगल लिया।
59. राजकुमार शेखपुरा हिसार हृदयघात : फसलों का विनाश सहन नहीं हुआ और दिल का दौरा पडऩे पर अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।  
60. श्रीचन्द (75 वर्ष) दड़ौली रेवाड़ी आत्महत्या : बैंक व सोसायटी का 45 लाख रूपये का कर्ज मुसीबत बना हुआ था। गेहूँ की फसल की बर्बाद ने सब्र का ऐसा बांध तोड़ा कि फांसी पर झूलने का निर्णय ले बैठा। 
61. धर्मपाल (22 वर्ष) दड़ौली रेवाड़ी आत्महत्या : बर्बाद फसल को नहीं देख पाया और अपनी जीवन लीला समाप्त कर डाली। 
62. अनीता (42 वर्ष) दड़ौली रेवाड़ी हृदयघात : पाँच एकड़ जमीन, जिसमें दो एकड़ ठेके पर थी, पर गेेहूँ की फसल उगा रखी थी। फसल बर्बादी ने भारी सदमा पहुँचाया। पंजाब नैशनल बैंक एवं सोसायटी से तीन लाख रूपये का कर्ज ले रखा था। गाँव में भी करीब 4 लाख का कर्ज चढ़ चुका था। बेटी का रिश्ता तय कर दिया था और आगामी नवम्बर में उसकी शादी करने की योजना थी। पूरी उम्मीद थी कि इस बार फसल से कर्ज हल्का हो जायेगा। लेकिन, ऐसा हो न सका। जब पति मुंशीराम के साथ गेहूँ की कटाई कर रही थी तो बालियों के भारी नुकसान को देखकर एकाएक लुढक़ गई। पति ने उसे संभाला तो उनकीं तरफ आँखों के इशारे से फसल बर्बादी का संकेत देते हुए मौके पर ही चल बसी। 
63. रामपाल (58 वर्ष) गुरावड़ा रेवाड़ी आत्महत्या : लाखों रूपये कर्ज लेकर बंटाई पर ली हुई 30 एकड़ गेहूँ की फसल लगाई रखी थी। फसल पूरी तरह तबाह हो गई। लाखों का कर्ज कैसे उतरेगा, इसी उधेड़बुन में सुबह चाय पीकर घर से निकला और खेतों में पेड़ पर फंदा लगाकर अपनी जान दे दी।  
64. सूरजभान (45 वर्ष) चन्दडक़लां फतेहाबाद आत्महत्या : बर्बाद हुई फसल का गम कई दिनों तक झेला। खेतों की गिरदावरी भी नहीं हुई। जब कोई उम्मीद दिखाई नहीं दी तो परेशान हो उठे और  फांसी का फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। पीडि़त परिवार ने इसके लिए जिला प्रशासन को दोषी ठहराया है। 
65. गिरीराज सिहोल पलवल हृदयघात : दूसरे के खेत पट्टे पर लेकर गेहूँ की फसल बड़ी उम्मीदों के साथ लगाई थी। दो माह बाद बेटी के हाथ पीले करने थे और साथ ही कर्ज अदा करना था। फसल की बर्बादी ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा और हार्टअटैक से जान चली गई। 
66. राजवीर रामगढ़ पलवल हृदयघात : फसल की बर्बादी को देखकर भारी सदमा लगा और हृदयघात के चलते मौत हो गई।
67. पालाराम दनौली करनाल हृदयघात : फसल कटाई के बाद जब कम गेहूँ निकला तो गहरे सदमे ने जान ले ली। 
68. तेजपाल (45 वर्ष) गुनियाना करनाल हृदयघात : 10 एकड़ जमीन, जिसमें पाँच एकड़ जमीन ठेके पर लेकर गेहूँ की फसल बोई गई थी। कम्बाईन से गेहूँ निकलवाये तो काफी कम गेहूँ निकला। यह देखकर ऐसा सदमा खाया कि मौत की आगोश में चला गया। 
69. मामराज (46 वर्ष) मंडलाएं पंचकूला हृदयघात : आधा एकड़ गेहूँ की फसल को मशीन से निकालने गए। उम्मीदों से काफी कम गेहूँ निकलने की बात सुनकर सदमा खा गए और चल बसे। 
70. संजीव शर्मा जासपुर पंचकूला हृदयघात : बर्बाद हुई फसल को देखकर सीने में दर्द उठा और मौके पर ही मृत्यु हो गई। उसे कर्ज की चिंता दिनरात सता रही थी। 
71. जोगेन्द्र (19 वर्ष) नांगल चौधरी महेन्द्रगढ़ आत्महत्या : फसल की बर्बादी झेल नहीं पाया और पेड़ पर फंदा लगाकर जान दे दी। 
72. जसवंत (46 वर्ष) अभोली सिरसा हृदयघात : फसल की बर्बादी देखकर सदमा लगा और हृदयघात से मौत हो गई।