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बुधवार, 31 मार्च 2010

(विशेष लेख)

सन्दर्भ : ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’


ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार की सौगात

-राजेश कश्यप



बेकारी, बेरोजगारी, भूखमरी, गरीबी आदि सब मानवीय जीवन के लिए किसी भयंकर अभिशाप के समान हैं। ये सब कुपोषण, आत्महत्या, अस्वस्थता, अशिक्षा, अंधविश्वास आदि न जाने कितनी अन्य समस्याओं के ग्राफ को निरन्तर बढ़ाने वाले मूल कारक हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात देश की सबसे बड़ी गंभीर समस्या गरीबी और भूखमरी ही थी। इसी के मद्देनजर राजनीतिक दलों ने देश से गरीबी व भूखमरी का नामोनिशान मिटाने का झण्डा बुलन्द करना और इस गंंभीर मुद्दे को अपने वोट बैंक का आधार बनाना शुरू किया। इस सन्दर्भ में कृषि एवं शिक्षा के विकास को बढ़ावा दिया गया और पंचवर्षीय जैसी कल्याणकारी योजनाओं के अलावा गरीबी उन्मूलन के अनेक कार्यक्रम लागू किए गए।

गरीबी एवं बेरोजगारी से निपटने के लिए सरकार द्वारा कार्य के बदले अनाज योजना, जवाहर रोजगार योजना, जवाहर ग्राम समृद्धि योजना, सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना जैसी अनेक योजनाएं समय-समय पर लागू की गईं। इन सब योजनाओं का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार देने का रहा। लेकिन दुर्भाग्यवश किसी न किसी खामी (कमी) का ये योजनाएं निरन्तर शिकार होती चलीं गईं और गरीबी एवं बेरोजगारी का दंश ज्यों का त्यों बना रहा। विपक्षियों द्वारा सरकारों के खिलाफ चलाए गए गरीबी एवं बेरोजगारी उन्मूलन आन्दोलनों ने जनता के हृदय में घी में आग का काम किया और अंतत: जनता-जर्नादन ने सरकार के समक्ष रोजगार की गारंटी देने की अहम  माँग कर डाली। रोजगार गारंटी की इस माँग ने एक समय सरकार की नींव तक हिलाकर रख दी थी।

रोजगार गांरटी योजना के लिए एक लंबे समय तक भयंकर संघर्ष चला और अंतत: जनता के अथक एवं अटूट संघर्षमयी आन्दोलनों की जीत हुई। सरकार ने पिछली रोजगार योजनाओं की खामियों को दूर करते हुए ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम, २००५’ को मूर्त  रूप दे दिया। इस अधिनियम को फरवरी, २००६ में सर्वसम्मति से संसद में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम, २००५ को तीन मुख्य चरणों में बांटकर लागू कर दिया। पहले चरण के अन्तर्गत देश के २०० जिलों में प्रायोगिक तौरपर योजना लागू की गईं। इस प्रथम चरण में वर्ष २००७-०८ के दौरान ३ करोड़ ३० लाख लोगों को रोजगार हासिल हुआ। कुछ खामियों को छोड़कर इस योजना को सफलता की श्रेणी में शामिल किया गया। योजना की सफलता से उत्साहित सरकार ने दूसरे चरण के अन्तर्गत अप्रैल, २००७ से देश के अन्य १३० जिलों में भी लागू कर दिया गया। अपेक्षानुरूप अच्छे परिणाम देखते हुए सरकार ने गत १ अपै्रल, २००८ से तीसरे चरण के अन्तर्गत देश के सभी जिलों में भी लागू कर दिया। इस तरह आज पूरे भारत में ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ लागू है।

योजना के प्रमुख उद्देश्य

इस योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष अर्थात् १ अप्रैल से ३१ मार्च के दौरान कम से कम १०० दिन का अकुशल शारीरिक रोजगार उपलब्ध करवाने का है। इस योजना के अन्तर्गत गाँव से बेरोजगारी एवं गरीबी को दूर करने, ग्रामीणों का शहरों में पलायन को रोकने, महिलाओं को सशक्त करने एवं गाँव की सामुदायिक, आर्थिक व सामाजिक परिसम्पतियों के निर्माण करने जैसे लक्ष्य रखे गए हैं।

योजना के लिए पात्रता एवं पंजीकरण

यह योजना परिवार एवं माँग पर आधारित है। गाँव का कोई भी वयस्क सदस्य जो १८ या उससे अधिक आयु का है, वह अपनी ग्राम पंचायत को लिखित में आवेदन देकर काम हासिल कर सकता है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले रोजगार के इच्छुक परिवार को अपने गाँव के सरपंच के पास अपना पंजीकरण करवा लेना चाहिए क्योंकि बिना पंजीकरण करवाए रोजगार के लिए आवेदन नहीं किया जा सकेगा। यह पंजीकरण पाँच वर्ष के लिए मान्य होगा। पंजीकरण सादे कागज पर अथवा सरपंच के पास उपलब्ध छपे हुए फार्म पर नाम, पता, आय ु, लिंग, जाति, परिवार के वयस्क सदस्यों के फोटो आदि विवरण दर्ज करवाया जाना बहुत जरूरी है।

रोजगार की प्रक्रिया

रोजगार के इच्छुक परिवार को ग्राम पंचायत द्वारा पंजीकरण के उपरांत एक रोजगार कार्ड (जॉब कार्ड) १५ दिन के अन्दर उपलब्ध करवाया जाता है। इसी जॉब कार्ड में रोजगार पाने वाले परिवार द्वारा किए गए काम के दिनों एवं प्राप्त की गई मजदूरी व बेरोजगारी भत्ता आदि का विवरण दर्ज किया जाता है। यह जॉब कार्ड रोजगार परिवार के पास ही रहता है और इसकी एक डुपलीकेट प्रति ग्राम पंचायत के पास स ुरक्षित रहती है। परिवार की सूचना पर जॉब कार्ड में वयस्क सदस्यों के नाम जोड़े अथवा काटे जा सकते हैं। जॉब कार्ड एकदम मुफ्त मिलता है। यदि किसी परिवार का जॉब कार्ड खो जाता है तो वह पंचायत को प्रार्थना-पत्र देकर उसकी डुप्लीकेट कॉपी हासिल की जा सकती है। इस सन्दर्भ में किसी भी तरह की शिकायत खण्ड विकास कार्यक्रम अधिकारी (बी.डी.पी.ओ.) अथवा जिला उपायुक्त (डी.सी.) को की जा सकती है।

जॉब कार्ड धारक को जब काम करने की जरूरत हो तो वह ग्राम पंचायत से काम देने के लिए लिखित या मौखिक माँग करनी चाहिए और माँग की रसीद हासिल करनी चाहिए। पंचायत को एक बार में कम से कम १४ दिन काम करने के लिए प्रार्थना-पत्र देना जरूरी होता है। इस दौरान मजदूर को सप्ताह में ६ दिन कार्य करना पड़ता है। एक विकलांग व्यक्ति भी काम के लिए आवेदन कर सकता है। पंचायत द्वारा उसकी शारीरिक क्षमता के अनुसार काम देगी। जॉब कार्ड धारक द्वारा लिखित में काम माँगने के १५ दिन के अन्दर पंचायत को उसे ५ किलोमीटर के दायरे में काम देना होगा। यदि ५ किलोमीटर से अधिक दूरी पर काम दिया गया तो मजदूर को १० प्रतिशत अतिरिक्त मजदूरी दी जाएगी।

बेरोजगारी भत्ता

यदि किसी मजदूर को पंचायत १५ दिनों के अन्दर काम नहीं दे पाती है तो उस मजदूर को पहले ३० दिनों के लिए न्यूनतम मजदूरी का चौथा हिस्सा और शेष दिनों के लिए मजदूरी का आधा हिस्सा बेरोजगारी भत्ते के रूप में दिया जाएगा। यदि काम माँगने वाला व्यक्ति दिए गए काम के लिए बताए गए स्थान पर नहीं पहुंचता है अथवा बेरोजगारी भत्ता पाने वाले व्यक्ति को काम दे दिया जाता है तो ऐसी परिस्थितियों में बेरोजगारी भत्ता नहीं मिलेगा।

कार्य की प्रकृति

ग्राम पंचायत या खण्ड विकास कार्यक्रम अधिकारी द्वारा तय किए गए कार्य ही मजदूरों को करने होते हें। मजदूर अपनी मर्जी से काम का चुनाव नहीं कर सकते हैं। यदि मजदूर चाहें तो ग्राम सभा में कार्यों के चयन के समय अपने सुझाव जरूर दे सकते हैं। इस योजना के अन्तर्गत जल संरक्षण, जल एकत्रण, वन रोपण, लघू व सूक्ष्म सिंचाई के नालों का निर्माण, अनुसूचित जाति@अनुसूचित जनजाति तथा भूमि सुधार कार्यक्रम, इन्दिरा आवास योजना के लिए निर्माण, जल निकासी, बाढ़ नियन्त्रण व संरक्षण और केन्द्र सरकार से परामर्श कर राज्य सरकार द्वारा निर्देशित अन्य कार्य करवाए जाते हैं।

मजदूरों को सुविधाएं

पंचायतों को कार्यस्थल पर मजदूरों के लिए स्वच्छ पीने का पानी, विश्राम व बच्चों के लिए छाया का प्रबन्ध, आपातकालीन उपचार, प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए प्राथमिक उपचार बॉक्स, पालनागृह@शिशुशाला जैसी सुविधाएं हर हालत में उपलब्ध करवाई जाएंगी। यदि किसी कार्यस्थल पर ६ वर्ष से कम आयु के पाँच या इससे अधिक बच्चे आते हैं तो पंचायत को महिला श्रमिकों अथवा विकलांग श्रमिक में से किसी एक की जिम्मेदारी उन बच्चों की देखभाल के लिए लगानी होगी। बच्चों की देखभाल करने वाले श्रमिक को अन्य श्रमिकों के बराबर ही न्यूनतम मजदूरी का भूगतान किया जाएगा। महिलाओं को रोजगार अवसरों के एक तिहाई भागीदारी देनी बहुत जरूरी है। इस योजना के तहत महिलाओं को पुरूषों के बराबर ही मजदूरी देने के प्रावधान किया गया है।

मजदूरी की दर एवं वितरण

राज्य सरकार द्वारा निर्धारित कृषि संबंधी न्यूनतम मजदूरी की दर ही योजना के अन्तर्गत मजदूरी की दर है। उदाहरण के तौरपर हरियाणा सरकार द्वारा १ जुलाई, २००७ से अकुशल श्रेणी की न्यूनतम मजदूरी दर १३५ रूपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। योजना के अन्तर्गत मजदूरी समय दर (टाईम रेट) के आधार पर हो अथवा ईकाई-दर (काम@पीस रेट) के आधार पर हो, लेकिन हर सूरत में मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी दर से भुगतान हर सप्ताह या अधिक से अधिक काम करने के १५ दिन के अन्दर करना बहुत जरूरी होता है। राज्य सरकार चाहे तो मजदूरों को उनके वेतन का एक भाग प्रतिदिन नगदी के रूप में दिलवा सकती है। यदि निर्धारित समय सीमा में मजदूरी का भुगतान नहीं होता है तो श्रमिक मजदूरी भुगतान अधिनियम, १९७२ के अन्तर्गत मुआवजा पाने का अधिकारी होगा। श्रमिकों के बचत खाते ग्रामीण बैंको अथवा गाँव के डाकघरों में मुफ्त में खोलने की सुविधा की गई है। श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी इन्ही बचत खातों में नियमित रूप से जमा की जाती है, जिसे श्रमिक जब चाहे निकलवा सकता है

मुआवजा सुविधाएं

इस योजना के अन्तर्गत किसी श्रमिक को काम करते हुए किसी भी तरह की चोट लग जाती है तो उसे नि:शुल्क चिकित्सा सुविधाएं दी जाती हैं। यदि श्रमिक को चोट के ईलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है तो उसका प्रबन्ध राज्य सरकार करती है। श्रमिक जब तक अस्पताल में रहता है, तबतक उसे आधी मजदूरी भत्ते के रूप में प्रतिदिन दी जाती है। यदि दुर्भाग्यवश काम करते हुए कोई श्रमिक दुर्घटना का का शिकार हो जाता है और स्थायी रूप से अपंग हो जाता है तो राज्य सरकार उसे क्षतिपूर्ति के रूप में अर्थात् मुआवजे के तौरपर २५ हजार रूपये की राशि दी जाती है। यदि दुर्घटना में श्रमिक की मृत्यु हो जाती है तो यह राशि उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को दी जाती है।

कुल मिलाकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना अकुशल मजदूरों के लिए एक वरदान के समान है। इस योजना के तहत कम से कम कोई व्यक्ति रोजगार का अभाव तो नहीं झेल पाएगा। यदि मजदूर इस योजना के अन्तर्गत अपनी ग्राम पंचायत के पास जाकर अपना पंजीकरण करवाएं और उनसे काम माँगे तो उनकी शत-प्रतिशत बेरोजगारी एवं बेकारी की समस्या का समाधान हो जाएगा। यदि योजना के कानूनी प्रावधानों का लाभ उठाते हुए मजदूर पूरी ईमानदारी, लगन, मेहनत एवं निष्ठा से काम करें तो गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी और बेकारी जैसी लाईलाज हो चुकी सामाजिक समस्याओं का समाधान पिछले ६० वर्षों में लागू हुई योजनाओं से संभव नहीं हो पाया, वह इस योजना में सौ प्रतिशत संभव हो सकता है। इसके बाद हर घर में खुशहाली होगी और हर गाँव में समृद्धि का आलम होगा। फिर देश में कोई भी व्यक्ति भूखे पेट नहीं सोएगा और हमारा प्रदेश व देश प्रगति एवं समृद्धि का एक नया इतिहास लिखने में सक्षम होगा। इन सब उपलब्धियों के लिए प्रत्येक श्रमिक को अपने काम का हक हासिल करना ही होगा।


(राजेश कश्यप)

स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक